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दिलीप जैन शिवपुरी

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About दिलीप जैन शिवपुरी

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  1. दसलक्षण पर्व को दसलक्षण पर्व ही बोलें* आज मैं आप सभी का ध्यान एक बात की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। हम सब लोग हमारे *दसलक्षण पर्व* को *पर्युषण* बोलते हैं, और *पर्यूषण* के नाम से ही जानते हैं। इतना ही नहीं हमारे *दिगंबर जैन समाज के अधिकांश लोग इसे पर्यूषण ही कहते हैं,* जबकि वास्तविकता यह है कि *पर्यूषण श्वेतांबर परम्परा में कहा जाता है, जो 8 दिन के होते हैं। जबकि दिगम्बर परम्परा में दसलक्षण पर्व 10 दिन के होते हैं।* और खास बात यह होती है, कि *जिस दिन हमारे दसलक्षण पर्व प्रारम्भ होते हैं, उस दिन पर्युषण पर्व समाप्त होते हैं।* *हमारे दिगंबर परम्परा में दसलक्षण पर्व, 10 धर्मो पर आधिरत होते हैं।* इन दस धर्म में *उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम अकिंचन और उत्तम ब्रह्मचर्य होते हैं।* चूंकि हम प्रत्येक दिन एक धर्म की आराधना करते हुए उसे अपने जीवन में अंगीकार करते हैं, और साधना को निरंतर बढ़ाते चले जाते हैं, तो इन्हीं दस धर्मों के कारण इन्हें *दसलक्षण महापर्व* कहा गया है। तो कृपया निवेदन है कि हम इन्हें दसलक्षण पर्व के नाम से ही संबोधित करें। सादर *दिलीप जैन शिवपुरी* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
  2. *प्रतिमाओं का मंजन* *विधि एवं आवश्यक सावधानियां* _*कुछ ही दिनों में हमारे दसलक्षण पर्व प्रारंभ हो जाएंगे, और उसके पूर्व मंदिर जी में प्रतिमाओं का मंजन प्रारंभ हो जाएगा।*_ प्रतिमाओं के मंजन के संबंध में लोगों को भ्रांति रहती है, अतः मार्गदर्शन स्वरूप यह पोस्ट दी जा रही है। *मंजन पूर्व की तैयारी-* 1- *खजूर की छोटी-छोटी डंडी लेकर उसका सिरा पत्थर से कूटकर उसे ब्रश जैसा बना लेना चाहिए, जिससे प्रतिमा पर जमे हुए दागों को साफ किया जा सके।* *2- लोंग का चूरा बनाने के लिए लोंग को धोकर अच्छी तरह से सुखा लेना चाहिए, और फिर सूखी लोंग को मिक्सी में चला कर उसका पाउडर बना लेना चाहिए।* *3- प्रतिमाओं के मार्जन हेतु रीठे को अच्छी तरह से साफ कर चेक कर लेना चाहिए जीव आदि न हों।* *4- (विशेष) मंजन हेतु साफ सूती हथकरघा का कपड़ा मंगा कर रख लेना चाहिए, बाजार में जो सूती कपड़ा मिलता है उसमें मटन टेलो होता है।* *अष्ट धातु की प्रतिमा का मंजन* _अष्ट धातु की प्रतिमा का मंजन *लौंग के चूरे में थोड़ा जल डाल कर उस चूरे से अच्छे से रगड़ना चाहिए।* फिर साफ कपड़े से रगड़ना चाहिए। लोंग के चूरे के बाद जितना अधिक स्वच्छ कपड़े से प्रतिमा को रगड़ेंगे, प्रतिमा उतनी ही अधिक चमक आएगी । *किसी भी हालत में पीताम्बरी अथवा नींबू आदि का प्रयोग कदापि न करना चाहिए।*_ *छोटी या मध्यम आकार की पाषाण की प्रतिमाओं का मंजन* _*पाषाण की प्रतिमाओं का मंजन अत्यंत सावधानी पूर्वक करना चाहिए।* इसके लिए सर्वप्रथम रीठे को धोकर अभिषेक के शुद्ध जल में उबाल लें। उसके बाद रीठे को मुलायम कपड़े में लेकर उसकी पोटली बनाकर उससे पाषाण की प्रतिमाओं का मंजन करते हैं। इसके लिए *प्रतिमा को मंजन से पहले किसी बड़ी थाली या कोपर आदि में विराजमान कर लेना चाहिए। जिससे जल इधर उधर न फैले, वह कोपर में ही रहे।*_ 👉 *खजूर के ब्रश उससे पाषाण की प्रतिमा यदि कहीं धूल आदि जमी हैं, तो उसे साफ करते हैं।* साथ ही रीठे के जल से मंजन करके अंत में साफ जल से प्रतिमा को साफ करते हैं। 👉 *प्रतिमा सूखने पर सूखे गोले से मंजन करना चाहिए।* *मूल नायक प्रतिमा अथवा अचल प्रतिमा का मंजन* _मूल नायक प्रतिमा का मार्जन उसी स्थान पर अत्यंत सावधानी के साथ करना चाहिए, इसके लिए *प्रतिमा के नीचे चारों ओर साफ सूखे कपड़े लगा देना चाहिए, जिससे मंजन का जल हमारे पैरों तक न आये।* बांकी विधि उपरोक्त अनुसार ही है।_ 👉 *याद रखिये गोले का चूरा किसी भी हाल में उपयोग नहीं करना चाहिए, नहीं तो उसके कण वेदी में फैल जाते हैं, एवं उसकी खुशबू से चींटियां आदि प्रतिमा पर एकत्रित हो जाती हैं।* 👉 *सारा कार्य अत्यंत विनय पूर्वक सावधानी से करना चाहिए। छोटी सी लापरवाही भी नहीं होनी चाहिए।* अंत मे मंजन किया हुआ जल जीव रहित सूखे स्थान पर विसर्जित करना चाहिए। एवं *वेदी में कपूर का चूरा डाल देना चाहिए, जिससे कोई भी जीव या चींटी आदि न आये।* *प्रस्तुति- दिलीप जैन शिवपुरी* 🚩 *पुण्योदय विद्यासंघ*🚩
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