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    यह जैन धर्म पर आधारित मासिक निशुल्क पत्रिका हैं. इसका संपादन एवं प्रकाशन श्री पी. के. जैन 'प्रदीप' द्वारा वर्तमान में मेलबोर्न, ऑस्ट्रेलिया से हो रहा हैं. इस पत्रिका के लगभग २,५०,००० से अधिक पाठक देश विदेश सम्पूर्ण विश्व में हैं. इसका प्रत्येक अंक एक विशेष विषय पर होने के कारण विशेषांक ही होता हैं. इसके संपादक श्री पी. के. जैन 'प्रदीप', अंतर्राष्ट्रीय संस्था नमोस्तु शासन सेवा समिति (रजिस्टर्ड) एक पंजीकृत संस्था हैं.
  4. किसी के प्रति अधिक रागात्मक भाव भी नही रखना भीअहिंसा है
  5. सत्य से बना शब्द सत अहिंसा है क्षमा को धारण करना अहिंसा हैसप्त व्यसन 5पाप और 4कषाय मन वचन और काय से किसी जीव को नहीं बताना अहिंसा है
  6. Khoot पर खेलना बहुत ही अच्छा लगा जैन धर्म की भी जानकारी मिलती है
  7. जय जिनेंद्र सभी को

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  8. मति ज्ञान के चार भेद है और 336भेद है ईहा आवाय अवगह धारणा
  9. अहिंसा मे अपार शक्ति है।वह शत्रु का नाश न करके शत्रुता का नाश करती है।अहिंसा श्रेष्ठ रसायन है।इसमें मधुरता का रस भरा है।अहिंसा से आत्मा की प्रसुप्त् अनंत दिव्य शक्तियां विकसित हो जाती है।अहिंसा मे अपार शक्ति है।वह शत्रु का नाश न करके शत्रुता का नाश करती है।अहिंसा श्रेष्ठ रसायन है।इसमें मधुरता का रस भरा है।अहिंसा से आत्मा की प्रसुप्त् अनंत दिव्य शक्तियां विकसित हो जाती है।
  10. मती ज्ञान ३३६ प्रकार के हैं| अवग्रह ईसा,आवाम,धारणा, ५इंद्रीय,१मन से, १२ प्रकार के वस्तुओं को जानता है,और मन और चक्षु को छोड़कर ४इंद्रीयोंसे व्यंजनावग्रह ज्ञान होता है, १२×६×४=२८८+४८=३३६
  11. आचार्यश्री जी का आशीर्वाद👏🏻👏🏻👏🏻

  12. अहिंसा एक मापदंड:- यदि आपके अंदर अहिंसा का भाव आ गया हैं तो बधाई हो आप मोक्ष महल की प्रथम सीढ़ी की ओर हैं।। ह्यको:- अहिंसा जानो मोक्ष मार्ग की ओर प्रथम सीढ़ी
  13. मति ज्ञान के भेद हैं चार :- १. अवग्रह २. ईहा ३. अवाय ५. धारणा
  14. मतिज्ञान के चार भेद है अवग्रह ईहा अवाय धारणा मधु जैन देहली 5
  15. मति ज्ञान के चार भेद हैं अवगृह ईहा अवाय धारणा इनके प़भेद करने पर मतिज्ञान के तीन सौ छत्तीस भेद भी बन जाते हैं
  16. मतिज्ञान के चार भेद १-अवग्रह २- ईहा ३-अवाय ५-धारणा
  17. मतिज्ञान के भेद हैं चार(अवग्रह ईहा अवाय धारणा), कष्टो का हो संहार ज्ञान की ज्योति तुम जलाओ, पुण्यात्मा फिर बन जाओ (इस पंक्ति में मतिज्ञान के भेद सहित ज्ञान की प्राप्ति का संदेश दिया गया है) - श्रीमति आराधना चौधरी द्वारा
  18. मति ज्ञान के भेद हैं चार अवग्रह् ईहा धारणा अपाय
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