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  2. Main Author: Ācārya Kundakunda Other Author: Vijay K. Jain Divine Blessings: Ācārya 108 Vidyānanda Muni Foreword: Dr. Chakravarthi Nainar Devakumar Publisher: Dehradun : Vikalp Printers, May 2019 Subjects: Jainism – Doctrines – Early works to 1800 Jaina Philosophy – Early works to 1800 Faith, Knowledge, Conduct, Liberation Description: lxiv + 342 p. ; 24 cm x 17 cm ISBN: 9788193272633 Format: Book; Hard-bound Language Note: In Prakrit; translation in Hindi and English; explanatory notes and prefatory matter in English. ‘Niyamasāra’ by Ācārya Kundakunda (circa 1st century BC) is among the finest spiritual texts that we are able to lay our hands on in the present era. The treatise expounds, with authority, the nature of the soul (ātmā) from the real, transcendental point-of-view (niścayanaya). It expounds the essence of the objects of knowledge, and, by the word ‘niyama’, the path to liberation. ‘Niyamasāra’ is the Word of the Omniscient Lord. It has the power to bestow ineffable happiness of liberation that is utterly rid of attachment, without obstruction, eternal, and sense-independent. This happiness is attained by meditating on the perfect-soul-substance which is pristine, and endowed with four qualities of infinite-knowledge, imperishable, indestructible, and indivisible. Worthy men aspiring for supreme happiness who comprehend this Scripture without contradiction of the empirical (vyavahāra) and the transcendental (niścaya) points-of-view are able to adopt conduct that leads their souls to the desired goal. By concentrating on the pure (śuddha) and inseparable (abheda) ‘Three Jewels’ (ratnatraya), eternal happiness appertaining to the perfect-soul-substance is attained. ‘Niyamasāra’ discourses right exertion for the soul and its fruit, the supreme liberation. Niyamasara-F-2019.pdf
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  4. Jain ca of Jabalpur went for guruji darshan....today in dayoday
  5. फिरोजाबाद में पहला मुनिसुब्रतनाथ भगवान का मंदिर जो मात्र 30 दिनों में बन कर तैयार हुआ
  6. हमें हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए, क्योंकि अगर हम उनको देख सकते हैं, तो हम निश्चय ही उनको पूरा भी कर सकते हैं। Best Suvichar

  7. मोक्ष कल्याणक श्री 1008 चन्द्रप्रभ जी फाल्गुन कृष्ण सप्तमी, 25 फरवरी 2019, सोमवार 🙏🏻भगवान चन्द्रप्रभ की जय🙏🏻 🙏🏻 मोक्ष कल्याणक पर्व की जय🙏🏻
  8. ज्ञान कल्याणक श्री 1008 चन्द्रप्रभ जी फाल्गुन कृष्ण सप्तमी, 25 फरवरी 2019, सोमवार 🙏🏻भगवान चन्द्रप्रभ की जय🙏🏻 🙏🏻 ज्ञान कल्याणक पर्व की जय🙏🏻
  9. मोक्ष कल्याणक श्री 1008 सुपार्श्वनाथ जी फाल्गुन कृष्ण सप्तमी, 25 फरवरी 2019, सोमवार 🙏🏻भगवान सुपार्श्वनाथ की जय🙏🏻 🙏🏻मोक्ष कल्याणक पर्व की जय🙏🏻
  10. ज्ञान कल्याणक श्री 1008 सुपार्श्वनाथ जी फाल्गुन कृष्ण षष्ठी, 24 फरवरी 2019, रविवार 🙏🏻भगवान सुपार्श्वनाथ की जय🙏🏻 🙏🏻ज्ञान कल्याणक पर्व की जय🙏🏻
  11. मोक्ष कल्याणक श्री 1008 पद्मप्रभ जी फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी , 22 फरवरी 2019, शुक्रवार 🙏🏻भगवान पद्मप्रभ की जय🙏🏻 🙏🏻मोक्ष कल्याणक पर्व की जय🙏🏻
  12. आज सुबह जब मेरे पति ने 17 तारीख को जैन समाज के भावी पदाधिकारियों द्वारा भोजन आमंत्रण की सूचना दी तो मैं अनायास ही चुनाव की तारीख के बारे मे पूछ बैठी। लेकिन यह जानकर हैरत मे पड़ गयी की हम महिलाओ को तो समाज मे वोट देने का अधिकार ही नही हे। क्या हमारी सबसे संपन्न और सभ्य कही जाने वाली समाज की मानसिकता इतनी संकीर्ण हे की यहा महिलाओ को पुरूषों के समानधीकार प्राप्त नही हौ सकते। क्या ये नियम मुसलमानों के तीन तलाक से बदतर नही हे ? हमारे लोकतांत्रिक देश मे एसे नियमों को कैसे स्वीकार किया जा सकता हे ? मै जानना चाहती हूँ कि समाज के किन ठेकेदारों ने यह निर्णय लिया और किस भाव से सभी वरिष्ठ जनों ने इस प्रकार के चुनाव की नियमावली मे अपनी स्वीकृति दी। आप सभी महानुभावो मे से जो भी मेरी बात से सहमत हैं कृपया 👍करे और ज्यादा से ज्यादा हर जैन ग्रुप मे फॉरवर्ड करे। आर्किटेक्ट सन्ध्या पुश्पेन्द्र जैन प्रदशर्न करता डॉ रवि कांत जैन कानपुर मो न 09935817665
  13. तप कल्याणक श्री 1008 धर्मनाथ जी माघ शुक्ल त्रयोदशी, 17 फरवरी 2019, रविवार 🙏🏻भगवान धर्मनाथ की जय🙏🏻 🙏🏻तप कल्याणक पर्व की जय🙏🏻
  14. जन्म कल्याणक श्री 1008 धर्मनाथ जी माघ शुक्ल त्रयोदशी, 17 फरवरी 2019, रविवार 🙏🏻भगवान धर्मनाथ की जय🙏🏻 🙏🏻जन्म कल्याणक पर्व की जय🙏🏻
  15. जन्म कल्याणक श्री 1008 अभिनन्दननाथ जी माघ शुक्ल 11/12, 16 फरवरी 2019, शनिवार 🙏🏻भगवान अभिनन्दननाथ की जय🙏🏻 🙏🏻जन्म कल्याणक पर्व की जय🙏🏻
  16. तप कल्याणक श्री 1008 अभिनन्दननाथ जी माघ शुक्ल एकादशी/बारस, 16 फरवरी 2019, शनिवार 🙏🏻भगवान अभिनन्दननाथ की जय🙏🏻 🙏🏻तप कल्याणक पर्व की जय🙏🏻
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