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Showing content with the highest reputation since 07/01/2021 in all areas

  1. आदिनाथ भगवान राजा नाभिराय के पुत्र माघ कृष्ण चतुर्दशी को कैलाश पर्वत से मोक्ष गये
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  2. जैनाचार्यों ने सात प्रकार के व्यसनों का वर्णन किया है -जुआ, मांसाहार, शराब, वेश्यागमन, शिकार, चोरी, पर स्त्री गमन।
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  3. सप्त व्यसन है महा दुखदाई, किया है जिसने दुर्गति पाई । नाम कौन है हमें बताता, इनसे बचता वो सुख पाता ॥
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  4. नाभिराय के पुत्र आदिनाथ भगवान का मोक्ष माध कृष्ण चतुर्दशी के दिन हिमालय पर्वत के कैलाश शिखर से हुआ ।
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  5. 1) Nabhirai ke putra- Rishabhdev,Adinath bhagwan 2) Magh badi 14 ke din UTTRASHAD Nakhtra me KAILASH PARVAT per Moksh hua
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  6. तीर्थंकर आदिनाथ ने कैलाश पर्वत (अष्टापद) से माघ कृष्ण चतुर्दशी के दिन मोक्ष पाया।
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  7. Bhagwan adinath माघ कृष्ण १४ मोक्ष स्थान कैलाश पर्वत
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  8. आदिनाथ भगवान माघ कृष्ण १४ कैलाश पर्वत
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  9. 🔔 आओ करे पुण्य कार्य 🔔 📕 लॉकर खोले 📕 एक ताले की दो चाबी आज आपको तीसरे प्रश्न का उत्तर देने के लिए पहले दो प्रश्नों का जवाब देना होगा 🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕 उदाहरण- दिशा को कहते है--दिक वस्त्र का पर्यायवाची--अम्बर हम जिस पंथ के अनुयायी है वह है --दिगम्बर 1️⃣ किसी बात की अधिकता को कहते है------ कषाय होती है------ व्रत में दोष लगना कहलाता है------ 🅰️ 2️⃣ शरीर का पर्यावाची--- त्याग करना को कहते है---- पूजन,पाठ के अंत मे करते है---- 🅰️ 3️⃣ मल रहित अर्थात---- आवागमन के साधन को कहते है----- एक कुलकर का नाम----- 🅰️ 4️⃣ हार का विलोम--- मित्र का विलोम----- एक रूद्र का नाम----- 🅰️ 5️⃣ बैल का पर्यायवाची---- सखा का पर्यायवाची----- एक बलदेव का नाम------ 🅰️ 6️⃣ नारी का विलोम---- मुँह का तत्सम रूप----- एक नारद का नाम------ 🅰️ 7️⃣ एक द्वीप का नाम--- प्रभु का पर्यायवाची---- एक कामदेव का नाम---- 🅰️ 8️⃣ नर का पर्यायवाची---- श्रेष्ठ का अर्थ है----- एक नारायण का नाम----- 🅰️ 9️⃣ उपवन में खिलते है---- दाँत का तत्सम रूप---- एक आचार्य का नाम----- 🅰️ 1️⃣0️⃣ कठोर,सख्त अर्थात---- सजा को कहते है---- एक तीर्थंकर का चिन्ह--- 🅰️ 1️⃣1️⃣ ऊर्जा का एक स्त्रोत्र--- राज दरबार मे शीर्ष सिहासन पर विराजित होता है----- एक तीर्थंकर के पिता----- 🅰️ 1️⃣2️⃣ मूर्ति या प्रतिमा को कहते है---- भवन का पर्यायवाची---- मन्दिरजी जिसका शिखर नही होता है वह कहलाता है------ 🅰️ सभी प्रयास करे। पुरुषार्थ से ही पुण्य बढेगा 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 सभी की उत्तर कुछ समय के लिए छुपे रहेंगे
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  10. दर्श पाइए अतिशयकारी चतुर्थकालीन नमिनाथ भगवान के जो मध्यप्रदेश के शहडोल ज़िले में विराजमान हैं संभवतः भारत में एकमात्र मंदिर जिसमें नमिनाथ भगवान मूलनायक के रूप में विराजमान हैं 🙏🙏🙏
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  11. समाधि-भक्ति तेरी छत्रच्छाया भगवन्! मेरे शिर पर हो। मेरा अन्तिम मरणसमाधि, तेरे दर पर हो॥ जिनवाणी रसपान करूँ मैं, जिनवर को ध्याऊँ। आर्यजनों की संगति पाऊँ, व्रत-संयम चाहू ॥ गुणीजनों के सद्गुण गाऊँ, जिनवर यह वर दो। मेरा अन्तिम मरणसमाधि, तेरे दर पर हो॥ १॥ तेरी.. ॥ परनिन्दा न मुँह से निकले, मधुर वचन बोलूँ। हृदय तराजू पर हितकारी, सम्भाषण तौलूँ॥ आत्म-तत्त्व की रहे भावना, भाव विमल भर दो। मेरा अन्तिम मरणसमाधि, तेरे दर पर हो ॥ 2॥ तेरी..॥ जिनशासन में प्रीति बढ़ाऊँ, मिथ्यापथ छोडूँ । निष्कलंक चैतन्य भावना, जिनमत से जोडूँ ॥ जन्म-जन्म में जैनधर्म, यह मिले कृपा कर दो। मेरा अन्तिम मरण समाधि, तेरे दर पर हो॥ 3॥ तेरी..॥ मरण समय गुरु, पाद-मूल हो सन्त समूह रहे। जिनालयों में जिनवाणी की, गंगा नित्य बहे॥ भव-भव में संन्यास मरण हो, नाथ हाथ धर दो। मेरा अन्तिम मरण समाधि, तेरे दर पर हो॥ 4॥ तेरी..॥ बाल्यकाल से अब तक मैंने, जो सेवा की हो। देना चाहो प्रभो! आप तो, बस इतना फल दो॥ श्वांस-श्वांस, अन्तिम श्वांसों में, णमोकार भर दो। मेरा अन्तिम मरण समाधि, तेरे दर पर हो॥ 5॥ तेरी..॥ विषय कषायों को मैं त्यागूँ, तजूँ परिग्रह को। मोक्षमार्ग पर बढ़ता जाऊँ, नाथ अनुग्रह हो॥ तन पिंजर से मुझे निकालो, सिद्धालय घर दो। मेरा अन्तिम मरण समाधि, तेरे दर पर हो॥ 6॥ तेरी..॥ भद्रबाहु सम गुरु हमारे, हमें भद्रता दो। रत्नत्रय संयम की शुचिता, हृदय सरलता दो॥ चन्द्रगुप्त सी गुरु सेवा का, पाठ हृदय भर दो। मेरा अन्तिम मरण समाधि, तेरे दर पर हो॥ 7॥ तेरी..॥ अशुभ न सो चूं, अशुभ न चाहूँ, अशुभ नहीं देखूँ। अशुभ सुनूँ ना, अशुभ कहूँ ना, अशुभ नहीं लेखूँ॥ शुभ चर्या हो, शुभ क्रिया हो, शुद्ध भाव भर दो। मेरा अन्तिम मरण समाधि, तेरे दर पर हो॥ 8॥ तेरी..॥ तेरे चरण कमल द्वय, जिनवर! रहे हृदय मेरे। मेरा हृदय रहे सदा ही, चरणों में तेरे॥ पण्डित-पण्डित मरण हो मेरा, ऐसा अवसर दो। मेरा अन्तिम मरण समाधि, तेरे दर पर हो॥ ९॥ तेरी..॥ मैंने जो जो पाप किए हों, वह सब माफ करो। खड़ा अदालत में हूँ स्वामी, अब इंसाफ करो॥ मेरे अपराधों को गुरुवर, आज क्षमा कर दो। मेरा अन्तिम मरण समाधि, तेरे दर पर हो॥ १०॥ तेरी..॥ दु:ख नाश हो, कर्म नाश हो, बोधि-लाभ वर दो। जिन गुण से प्रभु आप भरे हो, वह मुझमें भर दो॥ यही प्रार्थना, यही भावना, पूर्ण आप कर दो। मेरा अन्तिम मरण समाधि, तेरे दर पर हो॥ ११॥ तेरी..॥ तेरी छत्रच्छाया भगवन्! मेरे शिर पर हो। मेरा अन्तिम मरणसमाधि, तेरे दर पर हो॥
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  12. तीर्थंकर ऋषभदेव ने अष्टापद ( कैलाशपर्वत ) से मोक्ष प्राप्त किया
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  13. माघ कृष्ण चतुर्दशी ,कैलाशपर्वत (अष्टापद) से
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