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Showing content with the highest reputation since 09/16/2021 in all areas

  1. जैन धर्म के मूलमंत्र में ही अहिंसा परमो धर्म: (अहिंसा परम (सबसे बड़ा) धर्म कहा गया है।
    12 points
  2. मनुष्य के जीवन का मूल सुख और शांति है जो अहिंसा पर आधारित है वास्तव में हिंसा के विचार , हिंसा के वचन , हिंसा के प्रयत्न न करना अहिंसा है । अहिंसा एवं सत्य एक दूसरे के पूरक हैं । अहिंसा का आयतन अनुकंपा गुण है। अहिंसा से ही स्व-पर कल्याण संभव है। यह धर्म है अहिंसा घारो ,ह्रदय से बढ़ के । जीता स्वयं को जिसने, जिन शब्द कह रहा है ।। माने जो ऐसे जिनको, सच जैन वह रहा है । सच्चे बनोगे जैनी ,जिनवर के पथ पै चल के ।। तरुवर के धर्म जैसा ,उपकार सबका करना । सब में छिपी अहिंसा ,जिओ जिलाओ मिलके ।। यदि हो अहिंसा प्रेमी, स्वागत करो दिवस का । दिन में ही लो बाराती , दिन में हो भोज सबका ।। बन जाओ श्रेष्ठ मानव , कुरीतियां कुचल के । यह धर्म है अहिंसा धारो हृदय से बढ़ के ।। अहिंसा परमो धर्म:
    9 points
  3. अहिंसा का दूसरा रूप त्याग है और हिंसा का दूसरा रूप स्वार्थ है। मन में किसी का अहित न सोचना ,किसी को कटुवाणी आदि के द्वारा भी नुकसान न देना तथा कर्म से भी किसी भी अवस्था मे हिंसा न करना ,अहिंसा है।जैन धर्म और हिन्दू धर्म मे अहिंसा का बहुत महत्त्व है ।जैन धर्म के मूलमंत्र मे भी अहिंसा परमो धर्मः कहा गया है। अहिंसा भी दो प्रकार की है स्थूल और सूक्ष्म
    9 points
  4. जीवित प्राणियों को उन लोगों से भय नहीं रहता जिन्होंने अहिंसा का व्रत लिया हो। जैन धर्म के अनुसार, जीवन की सुरक्षा, जिसे "अभयदानम्" के रूप में भी जाना जाता हैं, सर्वोच्च दान हैं जो कोई व्यक्ति कर सकता हैं। लक्ष्मी जैन..अनसिंग.
    9 points
  5. नियम / दिशा निर्देश आपको अहिंसा पर आधारित एक वाक्य अथवा कुछ पंक्तियां लिखनी है | वाक्य ऐसा होना चाहिए जो अभी तक किसी और ने ना लिखा हो | सामूहिक प्रस्तुतीकरण का हो प्रयास - अहिंसा का कोई विषय अछूता ना रहे| आपकी रचनात्मकता शैली इस प्रयोग को सफल बनाएगी आपकी पंक्ति / पंक्तियों के अंत मे अहिंसा परमो धर्म की जय लिख सकते हैं | चित्र भी साथ मे संलग्न कर सकते हैं ( जैसे परीक्षा मे उत्तर देते हुए Diagram भी बनाते हैं) आप अंग्रेजी, मराठी अन्य भाषा में भी लिख सकते हैं आप को पूरा निबंध नहीं लिखना हैं सिर्फ - कुछ पंक्तियाँ लिखनी हैं आपके वाक्य को दो बार ना लिखे - एडिट क्लिक कर सुधार कर सकते हैं 3 october 21 रात्री दस बजे तक भाग लेने वालो मे* तीन प्रतिभागियों का चयन लक्की ड्रॉ द्वारा उपहार के लिए किया जाएगा उनके वाक्यों पर 5 पसंद Like होना अनिवार्य करे शुरुआत अहिंसा जैनाचार का प्राण तत्व हैं - इसे ही परम ब्रह्म और परम धर्म कहा गया हैं | अहिंसा परमो धर्म की जय
    8 points
  6. *~~```अहिंसा का पर्मोत्कृष्ट् रूप~```*~ कहा गया हैं की अभय अहिंसा का परिपाक है, वह अहिंसा की चरमसीमा है, अहिंसक न तो किसी से डरता है और न डराता है, भय को जीतने अहिंसा अपने आप अपनी पर्मोत्कृष्ट् पर प्रकट हो जाती है । 🙏अहिंसा परमो धर्मः 🙏
    8 points
  7. सभी व्रतों में अहिंसा व्रत मुख्य है ,क्योंकि बाकी के सभी व्रत अहिंसा व्रत की रक्षा के ही साधन है । सत्य , अस्तेय , ब्रह्मचर्य ,अपरिग्रह , 3 गुणव्रत , 4 शिक्षाव्रत , 11 प्रतिमाएं , महाव्रत आदि जितने भी व्रत है , अहिंसा धर्म का पोषण ही करते है । बिना अहिंसा के बाकी सभी व्रत कर्म निर्जरा में कारण नहीं बन सकते । अहिंसा परमो धर्म की जय
    8 points
  8. जो संसार के दुखो से प्राणियो को निकालकर उत्तम सुख मे पहुंचाता है वह अहिंसामय धर्म है, भगवान महावीर के द्वारा कह गयेपांच महाव्रत में प्राणी हिंसा से विरत होना अहिंसा महाव्रत है और इसे सबसे पहले रखा है अहिंसा का आशय किसी को न मारना वध करना नहीं है अपितु करुणा भाव दयाभाव और कषायपुर्वक मन वचन काय की प्रवृति न करना है निश्चय से रागादि भावो का उदभव न होना यही अहिंसा है और उनकी उत्पति होना हिंसा है यही जैन धर्म का सिद्धांत है जयजिनेंद्र
    8 points
  9. 🙏अहिंसा: जैन धर्म में अहिंसा संबंधी सिद्धान्त प्रमुख है। मन, वचन तथा कर्म से किसी के प्रति असंयत व्यवहार हिंसा है। पृथ्वी के समस्त जीवों के प्रति दया का व्यवहार अहिंसा है। इस सिद्धांत के आधार पर ही जियो और जीने दो का सिद्धांत परिकल्पित हुवा है |
    8 points
  10. अहिंसा परम धर्म हैं, अहिंसा परम संयम है, अहिंसा परम दान है तथा अहिंसा परम यज्ञ है, अहिंसा परम फल है, अहिंसा परम मित्र है और अहिंसा परम सुख है. –
    8 points
  11. अहिंसा जननी है- जीवन विकास की, अंतर विलास की, विश्व शांति की, आध्यात्मिक क्रांति की, सत्य अमृत की, अस्तेय व्रत की, ब्रह्मचर्य बल की, अपरिग्रह सुफल की, मैत्री भाव की, करुणा स्वभाव की। अहिंसा व सत्य जैन धर्म की धड़कन है। यदि अपनाना चाहते हो तो "अहिंसा परमो धर्म:" अपनाओ। अर्थात अहिंसक ही क्षमा धारण कर सकता है
    7 points
  12. प्रेम और अहिंसा से ही मानवता का विकास है| अहिंसा परमो धर्म की जय🙏🏻
    7 points
  13. काम हो रहा मिलजुल कर, वहांं हिंसा का क्या काम इसीलिए तो श्रेष्ठ कहलाता,यह सत्य"अहिंसा"नाम| 'मारपीट'कर कोशिश करते,नहीं बनता उनका काम अब तो छोड़ो हिंसा को,शायद बन जाये वह'काम'| दर्द को समझो,माफ करो तुम सब जीवित प्राणी को एक बार तुम ध्यान से सुन लो तीर्थंकर की वाणी को| कलयुग है हिंसा से पीड़ित,'हिंसक'बन गया इंसान कर्म करो तुम अपने अच्छे,स्वयं पुकारेंगें"भगवान"|| [मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है, सत्य मेरा भगवान है और अहिंसा उसे पाने का साधन है] "अहिंसा परमो धर्मः"
    7 points
  14. "Ahinsa" Ka arth hai -: 'Hinsa ka poorntaya tyag'. Ahinsa jain Dharm ka Adhaar Stambh hai. "Jeevo ki raksha karna hi hum sabhi jaino ka mahatvapurn prayaas hai." "Ahinsa Parmo Dharma"
    7 points
  15. जीवों का जहाँ घात न हो, मन वचन काय से आघात न हो। जहाँ सबके प्राणो की चिंता है, वह धर्म मूल अहिंसा है। जब हरी घास पर पैर पड़े न, चीटी के भी प्राण हरे न। जहाँ एक घाट पर शेर गाय के, रहने की अनुशंसा है। गौ माता के प्राण बचाने वाला धर्म अहिंसा है। "अहिंसा परमो धर्मः"।
    6 points
  16. अहिंसा संगोष्ठी हमारा सबसे बड़ा कर्त्तव्य है. यदि हम इसका पूरा पालन नहीं कर सकते तो हमे इसकी भावना को अवश्य समझना चाहिए और जहां तक संभव हो हिंसा से दूर रहकर मानवता का पालन करना चाहिए. इस प्रकार जिए की आपको कल मर जाना है. सीखें उस प्रकार जैसे आपको सदा जीवित रहना है. गांधीजी ने प्रभुवीर की वाणी से अहिंसा का पाठ सीखा. हम इतने सालो से प्रभुवीर की वाणी सुनते आ रहे है.... हमने क्या सीखा? अहिंसा परमो धर्म की जय!🙏
    6 points
  17. अहिंसा वहां होती हैं जहां प्रमाद नही होता। अहिंसा सब धर्मों की जनक हैं अहिंसा विश्व बंधुत्व की जननी है। अहिंसा व्रत अंक है शेष सब शून्य हैं अहिंसा में डूब जाना अध्यात्म हैं। अहिंसा कार्य कारण समयसार हैं अहिंसा मूल व्रत शेष चार रक्षा कवच हैं। अहिंसा जो धारे उसी का समाधिमरण सम्भव है।। अहिंसा निजात्मा में उतपन होने वाला अंकुर हैं। अहिंसा आत्मोथान का प्रथम सोपान हैं अहिंसा का ओर क्या वर्णन करे सभी शब्द कम पड़े।। **अहिंसा परमो धर्म की जय**
    6 points
  18. अहिंसा का सामान्य अर्थ हैं हिंसा न करना। मन, वचन ,काय से षट्काय के जीवों की रक्षा करना। . ... अहिंसा परमोधर्मः
    6 points
  19. ज्ञान से मिलता भव का किनारा, ज्ञान बिना न कोई सहारा । मतिज्ञान के भेद बताओ, केवलज्ञानी तुम बन जाओ ॥ आपके द्वारा दिया गया उत्तर किसी को भी नहीं दिखेगा सभी उत्तर एक साथ खोले जाएंगे आपकी रचनात्मकता शैली इस प्रयोग को सफल बनाएगी आपका स्वाध्याय - आज आपका उपहार
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  20. *वीरा की हायकू* ( अहिंसा दिवस विशेष) 🙏🏻 *अहिंसा*🙏🏻 पंप पाप से हिंसा प्रथम पाप त्यागते व्रती ।। त्यागते इसे द्रव्य औ भाव रुप अहिंसाप्रेमी ।। कम से कम संकल्प हिंसा त्याग करे आगारी।। दया करता जीवदया भाव है प्राणियों पर ।। कृषि वाणिज्य करता है श्रावक उद्योगी हिंसा ।। प्रात: करती जगत की महिला आरंभ हिंसा।। दिल दुखाना इससे ना बचा वो भाव हिंसा है ।। धर्म हमारा परम अहिंसा का शान से बोलो।। अहिंसा परमो धर्म की जय हो। वीरश्री शीतल पाटील, नेरुल नविमुम्बई
    5 points
  21. जय जिनेन्द्र🙏🏻 बिना कारण तथा स्वार्थ के हेतु हिंसा करना अधर्म है । वास्तव में अहिंसा ही परम धर्म है और उसके साथ सत्य, क्रोध ना करना, त्याग, मन की शांति, निंदा न करना, दया भाव, सुख के प्रति आकर्षित ना होना, बिना कारण कोई कार्य न करना, तेज, क्षमा, धैर्य, शरीर की शुद्धता, धर्म का द्रोह ना करना, तथा अहंकार न करना, इतने गुणों को सत्व गुणी संपत्ति कहा जाता है। इसी से मनुष्य परमात्मा की भक्ति कर पाता है जीवन के कर्तव्य का वहन करता है धर्म की स्थापना करता है और धर्म के फल की आशा का त्याग करके जीता है।
    5 points
  22. "अहिंसा परमो धर्म" अहिंसा ही परम धर्म है। यह सभी धर्मों से महान् है, अन्य सारे धर्म इसके सामने गौण हैं। हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने तो यहाँ तक कहा है-मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है और अहिंसा उसे पाने का साधन।
    5 points
  23. सब धर्मो का मूल अहिंसा महावीर कि वाणी अहिंसा इस धरती कि शान अहिंसा सबसे श्रेष्ठ धर्म अहिंसा साधुओ कि चर्या है अहिंसा हिंसा से बचना है अहिंसा विद्यागुरु का प्रयास अहिंसा सब के मन मे हो भाव अहिंसा अहिंसा परमो धर्म कि जय
    5 points
  24. अहिंसा शब्द है अनमोल,घट-घट समाए हिंसा जङ विषाद की ,आनंद अहिंसा कहाए बंधन मे लिप्त प्रेम ही,हिंसा का भाव जगाए मुक्त-स्वतंत्र प्रेम यदि तो,अहिंसा को जगाए । "अहिंसा परमो धर्मः " जय जिनेन्द्र 🙏🙏🙏
    5 points
  25. छह काय (स्थावर व त्रस) के जीवों का घात करना 'द्रव्यहिंसा' व राग-द्वेष-काम-क्रोध-मान इत्यादि भावों की उत्पत्ति 'भावहिंसा'हैअतः इन दोनों का अभाव ही अहिँसा है जो सभी के प्राणों की रक्षा के लिए प्राणी मात्र का धर्म है!अंहिसा परमो धर्म की जय|
    5 points
  26. जैन धर्म में सब जीवों के प्रति संयमपूर्ण व्यवहार अहिंसा है। अहिंसा का शब्दानुसारी अर्थ है, हिंसा न करना। हिंसा न करनेवाला यदि आँतरिक प्रवृत्तियों को शुद्ध न करे तो वह अहिंसा न होगी। अहिंसा में हिंसा का निषेध होना आवश्यक है। अहिंसा परमो धर्मः
    5 points
  27. कोणतीही कृती प्रत्यक्ष घडण्या आधी ती विचारांच्या मदतीने मेंदूत आभासी रूपाने घडते. म्हणुनच बाहेरील, भौतिक हिंसाचाराला आळा बसवायचा असेल तर हिंसक मानसिकतेवर आळा बसवावा लागेल. उत्तम फळ मिळवायचे असेल तर मुळाशी जावून कार्य करावे लागेल. ज्यावेळी सम्यक दर्शन आणि सम्यक ज्ञान या दोहोंचा ध्यास घेतला जाईल त्यावेळी अलगद सम्यक चारित्र्याची जडण घडण होईल!! तेव्हाच अहिंसेचे गूढ आकलनीय होईल!!! म्हणजेच मेंदूच्या अंगणात सुंदर संस्काराच्या सड्या ने शिंपडुन शुद्ध विचारांची रांगोळी आविष्कृत होईल व जग रूपी घरात अहिंसालक्ष्मी चा वास कायम असेल! अर्थातच तो जिन (जैन) होईल!!! #डॉ. सौ. अल्फा प्रशांत जैन दिग्रस, जि. यवतमाळ, विदर्भ, महाराष्ट्र.
    5 points
  28. द्रव्य में ना हो प्रमाद ना हो भावों में आवेग हर क्षण सम्यकत्व परम अहिंसा का यही है सहज भेद अर्थ और रुप मीना पाड़लिया
    5 points
  29. अहिंसा का सामान्य अर्थ है 'हिंसा न करना'। इसका व्यापक अर्थ है - किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से कोई नुकसान न पहुँचाना।
    5 points
  30. अहिंसा मात्र शब्द नहीं है। एक जीवन है जो त्याग की और ले जाता है और हिंसा पाप की और। सभी धर्म अहिंसा को धारण करते है , परंतु जैन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जिसने अहिंसा को एक ऐसा उपकरण माना है और हर उस आत्मा को धारण करना चाहिए जो जिनेन्द्र भक्त है। अहिंसा का अर्थ केवल ये ही नहीं है कि किसी को मारना या हत्या नही करना अपितु इसका व्यापक रूप है हर उस प्राणी के लिए हरदय में क्षमा करुणा दया लोभ और सभी विकारों का त्याग करना तभी हम भावनात्मक और निषेधात्मक हिंसा से दूर रहकर अहिंसा का पालन कर सकते हैं। आज अहिंसा का रूप एक औ र भी है जो हमारे करुणामयआचार्यश्री जी विद्यासागर जी ने अहिंसक वस्त्र अहिंसक ओषधी अहिंसक खाद्य पदार्थ जिसे अपना कर हम अहिंसा की अलख जगा सकती हैं। जीओ और जीने दो ये महावीर का नारा जो जैन धर्म को अहिंसा परमो धर्म का उपदेश देता है।
    4 points
  31. ।।अहिंसा, जैनधर्म का आधार है।। अहिंसा का पालन करना स्वयं के प्रति उपकार करना है। यदि हम मन वचन काय से अहिंसा धर्म का पालन करते हैं तो हमारे लिए मोक्ष निकट आता जाता हैं। क्षमा और दया, अहिंसा के आधार स्तंभ हैं। कमठ ने यदि तीर्थंकर पार्श्वनाथ भगवान के जीव को क्षमा कर दिया होता तो उसे भी अब तक मोक्ष प्राप्त हो जाता। तीर्थंकर पार्श्वनाथ भगवान ने दया, क्षमा, अहिंसा आदि महाव्रत के द्वारा मोक्ष प्राप्त किया। आज यदि हम जीवों की रक्षा करते हैं तो यह हमारी स्वयं की रक्षा है। यदि आज हम किसी जीव को संकल्प पूर्वक मारते है तो भविष्य में वो जीव हमें भी मारेगा या मार सकता है। इसलिये हमें निरन्तर पूर्व में किये पापों की निर्जरा करते रहना चाहिए। इसलिए हमें किसी भी जीव को मारना या सताना नहीं चाहिए। किसी भी जीव को किसी भी प्रकार से दुःख नहीं पहुँचाना ही अहिंसा है। अहिंसा परमो धर्म की जय हो... दिनेश कुमार जैन "आदि" मुम्बई - अम्बाह
    4 points
  32. अहिंसा को अपनाकरही,जीवन होता है सफल। हिंसा से होता नुक़सान, नहीं निकलता कोई हल।। नाहीं दुखाओ दिल किसी का,नाहीं चोट पहुँचाओ। तोड़ फोड़ , मार धाड़ त्यागकर, अहिंसा के मार्ग को अपनाओ।। ”अहिंसा परमों धर्म” है, ये भगवान महावीर ने है बतलाया। जीओ और जीने दो का पाठ, सारे जग को है सिखलाया।। अहिंसा परमो धर्म:
    4 points
  33. अहिंसा परमो धर्म अहिंसा का सामान्य अर्थ है हिंसा न करना किसी भी प्राणी को तन, मन,कर्म, वचन और वाणी से नुकसान नहीं पहुंचाना। अहिंसाव्रत की चार भावनाएं है। वचन गुप्ति, इर्या समिति, आदानि निक्षेपण समिति, आलोकित पान भोजन। एकदेश अहिंसादी व्रतों का पालन करने वाला क्रमशः स्वर्ग सुख को प्राप्त कर परंपरा से मोक्ष को प्राप्त करता है। जो संकल्प पूर्वक त्रस हिंसा का त्यागी है और बिना प्रयोजन स्थावर जीवो की भी विराधना नहीं करता है वह अहिंसाणुव्रत्ति है।
    4 points
  34. मन में किसी का अहित न सोचना, किसी को कटुवाणी आदि के द्वार भी नुकसान न देना तथा कर्म से भी किसी भी अवस्था में, किसी भी प्राणी कि हिंसा न करना, यह अहिंसा है। जैन धर्म एवं हिन्दू धर्म में अहिंसा का बहुत महत्त्व है। जैन धर्म के मूलमंत्र में ही अहिंसा परमो धर्म: (अहिंसा परम (सबसे बड़ा) धर्म कहा गया हैै |
    4 points
  35. मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित हैं, सत्य मेरा भगवान हैं और अहिंसा उसे पाने का साधन हैं।
    4 points
  36. अहिंसा का सीधा-साधा अर्थ करें तो वह होगा कि व्यावहारिक जीवन में हम किसी को कष्ट नहीं पहुंचाएं, किसी प्राणी को अपने स्वार्थ के लिए दुख न दे
    4 points
  37. हिंसा किसी मनुष्य, समाज और देश के लिए हितकर नही हो सकता हैं इसलिए अहिंसा ही सबका धर्म होना चाहिए. हम खुशनसीब हैं कि हम भगवान महावीर के वंशज हैं जिसका अहिंसा ही धर्म है और अहिंसा ही मर्म. ।।।।।। अहिंसा परमो धर्म...।।
    4 points
  38. सुख का मूल धर्म है। धर्म का मूल दया है। दया का मूल अहिंसा है। ।।जय जिनेंंन्द्र।।
    4 points
  39. चार प्राकार की हिंसा में से एक संकल्पई हिंसा न करने का प्रण करके अहिंसा धर्म का पालन कर सकेंगे।इन्द्रिय संयम व प्राणी संयम को अपना कर भी हम अहिंसक बन सकते है अहिंसा परमोधर्म ही श्रेष्ठ है।
    4 points
  40. अहिंसा एक रहस्यमई शब्द है जिसे कम ही लोग समझते हैं अधिकतर लोग यही जानते हैं कि किसी से किसी की पिटाई मत करो किसी को घायल मत करो किसी की जान मत लो यही अहिंसा है अहिंसा का यह अर्थ तो है ही इसके अतिरिक्त यदि किसी व्यक्ति को अपमानित करते हैं तो यह भी एक प्रकार की हिंसा है किसी के बारे में बुरा सोचते हैं यह भी एक प्रकार की हिंसा है Jj
    4 points
  41. अहिंसा - सत्य प्राप्ति का मार्ग है और सत्य से भिन्न कोई ईश्वर नही है। ‌Hate the sin, not the sinner
    3 points
  42. 🌍 दुनिया में अगर शांति प्रस्तापित करनी है तो वो सिर्फ अहिंसा मार्ग से ही मुम्किन है 🦚 जैनियों का नारा सच्चा धर्म अहिंसा हमारा आज, कल और हमेशा 🌺🌺🌺🌺🌺 अहिंसा परमो धर्म की जय 🙏
    3 points
  43. अहिंसा याने मन वचन काय कृत कारित अनुमोदन से और भाव से भी किसी प्राणी के बारे मे मन मे हिसा के विचार नही लाना
    3 points
  44. हिंसा न करना उससे बचना हि अहिंसा का पालन करना है अहिंसा परमो धर्म कि जय
    3 points
  45. मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित हैं, सत्य मेरा भगवान हैं और अहिंसा उसे पाने का साधन हैं।
    3 points
  46. काया, वाचा व मन यांनी कोणालाही इजा/दुखापत न करणे म्हणजे अहिंसा. अहिंसे चे तत्व सर्वांनी स्वीकारल्यास संपुर्ण विश्वा मध्ये सुख शांती व समाधान नांदेल.जैन धर्मा मध्ये अहींसे ला खूप महत्त्व आहे. भगवान महावीर स्वामींचा संदेश परोस्परो ग्रहानाम(जगा आणि जगू द्या) याची आज संपुर्ण विश्वाला खूप गरज आहे. "जय जिनेन्द्र"
    3 points
  47. भगवान महावीर ने अपनी वाणी से और अपने स्वयं के जीवन से इसे वह प्रतिष्ठा दिलाई कि अहिंसा के साथ भगवान महावीर का नाम ऐसे जुड़ गया कि दोनों को अलग कर ही नहीं सकते। अहिंसा का सीधा-साधा अर्थ करें तो वह होगा कि व्यावहारिक जीवन में हम किसी को कष्ट नहीं पहुंचाएं, किसी प्राणी को अपने स्वार्थ के लिए दुख न दें।
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