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अंजलि जैन

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  1. आचार्य श्री पूज्यपाद द्वारा रचित इष्टोपदेश ग्रंथ में कुल 51 श्लोक हैं।
  2. १-ऐरावत हाथी, २-सफेद बैल, ३-सिंह, ४-दो सफेद फूल, ५-सिंहासन पर लक्ष्मी, ६-पूर्ण चंद्रमा, ७-उदित सूर्य, ८-दो स्वर्ण कलश, ९-युगल मछली, १०-तालाब, ११-समुद्र, १२-स्वर्णमय सिंहासन, १३-रत्नमय विमान, १४-नाग भवन, १५-रत्न, १६-निर्धूम अग्नि।
  3. ईषत प्राग्भार नाम की अष्टम वसुधा है
  4. कर्मो का आस्रव 108 द्वारों से होता है, उसको रोकने हेतु 108 बार णमोकार मन्त्र जपते हैं।
  5. इस (सुमेरू) पर्वत की ऊंचाई १०००४० योजन है और इसमें चार वन में, चारों दिशाओं में, १-१ जिन मंदिर होने से, कुल १६ जिन मंदिर है।
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