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?भारत की राजधानी दिल्ली में प्रवेश - अमृत माँ जिनवाणी से - ३१७

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Abhishek Jain

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        मैं पूज्य आचार्यश्री शान्तिसागरजी महराज के जीवन चरित्र का लगातार अध्ययन कर रहा हूँ, फलस्वरूप मेरी दृष्टि में पूज्यश्री का दिल्ली का चातुर्मास एक महत्वपूर्ण चातुर्मास था। इस चातुर्मास के माध्यम से दिगम्बरत्व का प्रचार भली प्रकार से हुआ। सर्वत्र दिगम्बर मुनिराज के दर्शन व जन-जन तक उनके स्वरूप की जानकारी पहुँचना पूज्य शान्तिसागरजी महराज के उत्कृष्ट तपश्चरण का ही प्रभाव था।

?   अमृत माँ जिनवाणी से - ३१७   ?


  "भारत की राजधानी दिल्ली में प्रवेश"


                पूज्य शान्तिसागरजी महराज ने ससंघ  ललितपुर चातुर्मास के उपरांत बूंदेलखड की सभी तीर्थ, ग्वालियर, आगरा, मथुरा विभिन्न स्थानों को अपनी पदरज से धन्य करते हुए राजधानी दिल्ली में प्रवेश किया। 

         खुरजा के अपने अमृत-उपदेश से उपकृत करते हुए संघ ने प्रस्थान कर सिकन्दराबाद में निवास किया। इसके अनंतर गजियाबाद तथा शहादरा होते हुए पौष सुदी दशमी को संघ ने भारत की राजधानी दिल्ली में प्रवेश किया।

       कहते हैं, अब पचास हजार से भी अधिक संख्या हो गई है। वहाँ धार्मिक प्रकृति के लोग बहुत हैं, इसलिए संघ के आने पर दिल्ली समाज के रोम-रोम में आनंद व्याप्त होता था। 

          राजधानी के योग्य गौरवपूर्ण जुलूस द्वारा आचार्य शान्तिसागर महराज के प्रति भक्ति व्यक्त की गई। बडे-बड़े प्रतिष्ठान तथा विचारशील नागरिक तथा उच्च अधिकारी लोग आचार्यश्री के दर्शनार्थ आते थे, अनेक महत्वपूर्ण प्रश्न करते थे तथा समाधान प्राप्त कर हर्षित होते थे।


? स्वाध्याय चारित्र चक्रवर्ती ग्रंथ का ?
?आजकी तिथी- वैशाख कृ० १३/१४?

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