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Lyric: भक्तामर स्तोत्र श्लोक 17
नास्तं कदाचिदुपयासि न राहुगम्य:,
स्पष्टीकरोषि सहसा युगपज्- जगन्ति।

नाम्भोधरोदर-निरुद्ध-महा- प्रभाव:,
सूर्यातिशायि-महिमासि मुनीन्द्र! लोके॥ 17॥
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