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☀उपवास तथा महराज के विचार - ३३६


Abhishek Jain

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? अमृत माँ जिनवाणी से - ३३६  ?


       *उपवास तथा महराज के विचार*


          सन १९५८ के व्रतों में १०८ नेमिसागर महराज के लगभग दस हजार उपवास पूर्ण हुए थे और चौदह सौ बावन गणधर संबंधी उपवास करने की प्रतिज्ञा उन्होंने ली।

       महराज ! लगभग दस हजार उपवास करने रूप अनुपम तपः साधना करने से आपके विशुद्ध ह्रदय में भारत देश का भविष्य कैसा नजर आता है?

       देश अतिवृष्टि, अनावृष्टि, दुष्काल, अंनाभाव आदि के कष्टों का अनुभव कर रहा है।

         महराज नेमिसागर जी ने कहा- "जब भारत पराधीन था, उस समय की अपेक्षा स्वतंत्र भारत में जीववध, मांसाहार आदि तामसिक कार्य बड़े वेग से बढ़ रहे हैं। इनका ही दुष्परिणाम अनेक कष्टों का आविर्भाव तथा उनकी वृद्धि है।"


? *स्वाध्याय चा. चक्रवर्ती ग्रंथ का*?
    ?आजकी तिथी - वैशाख कृष्ण १?

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