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Lyric: प्राकृत में जिनवाणी स्तुति : मुनिश्री प्रणम्यसागरजी
🙏🏻जिणवाणी थुदि🙏🏻🌹

सिरि जिणवाणी जग कल्लाणी
जगजणमदतममोहहरी
जणमणहारी गणहरहारी
जम्मजराभवरोगहरी ।
तित्थयराणं दिव्वझुणिं जो
पढइ सुणइ मईए धारइ
णाणं सोक्खमणंतं धरिय
सासद मोक्खपदं पावइ ।।
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