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JainSamaj.World
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Lyric: भक्तामर स्तोत्र श्लोक 1
भक्तामर-प्रणत-मौलि-मणि-प्रभाणा-
मुद्योतकं दलित-पाप-तमो-वितानम्।

सम्यक्-प्रणम्य जिन-पाद-युगं युगादा-
वालम्बनं भव-जले पततां जनानाम्।। 1॥

1 Comment

Bohat Sunder samjhaya 

Mauli main galat padhti th..ab se sahi padhungi

 

 

 

 

 

 

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