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Lyric: भक्तामर स्तोत्र श्लोक 39
भिन्नेभ-कुम्भ- गल-दुज्ज्वल-शोणिताक्त,
मुक्ता-फल- प्रकरभूषित-भूमि-भाग:।

बद्ध-क्रम: क्रम-गतं हरिणाधिपोऽपि,
नाक्रामति क्रम-युगाचल-संश्रितं ते॥ 39॥
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