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तेरी शांति छवि पे मैं


admin

तेरी शांति छवि पे मैं

तेरी शांति छवि पे मैं बलि बलि जाऊँ

खुले नयन मारग आ दिल मैं बिठाऊँ ॥

 

लेखा ना देखा, धर्म पाप जोड़ा,

बना भोग लिप्सा कि चाहों में दौड़ा,

सहे दुख जो जो कहा लो सुनाऊँ ॥ तेरी शांति... ।१।

 

तेरा ज्ञान गौरव जो गणधर ने गाया

वही गीत पावन मुझे आज भाया

उसी के सुरों में सुनो मैं सुनाऊँ ॥ तेरी शांति छवि.. ।२।

 

जगी आत्म ज्योति सम्यक्त्व तत्त्व की

घटी है घटा शाम मिथ्या विकल की

निजानन्द सौभाग्य सेहरा सजाऊँ-२ ॥ तेरी शांति छवि. ।३।



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