Jump to content
फॉलो करें Whatsapp चैनल : बैल आईकॉन भी दबाएँ ×
JainSamaj.World

सुनो जिया ये सतगुरु की बातैं


admin

सुनो जिया ये सतगुरु की बातैं, हित कहत दयाल दया तैं ॥

 

यह तन आन अचेतन है तू, चेतन मिलत न यातैं

तदपि पिछान एक आतमको, तजत न हठ शठ-तातैं ॥

 

चहुँगति फिरत भरत ममताको, विषय महाविष खातैं

तदपि न तजत न रजत अभागै, दृग व्रत बुद्धिसुधातैं ॥

 

मात तात सुत भ्रात स्वजन तुझ, साथी स्वारथ नातैं

तू इन काज साज गृहको सब, ज्ञानादिक मत घातै ॥

 

तन धन भोग संजोग सुपन सम, वार न लगत विलातैं

ममत न कर भ्रम तज तू भ्राता, अनुभव-ज्ञान कलातैं ॥

 

दुर्लभ नर-भव सुथल सुकुल है, जिन उपदेश लहा तैं

दौल तजो मनसौं ममता ज्यों, निवडो द्वंद दशातैं ॥

 



×
×
  • Create New...