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श्री नन्दीश्वर द्विप आरती


admin

जय बावन जिन देवा, जय बावन जिन देवा |

आरती करूँ तुम चरणे-२ भवजल नदि न्हावा || जयदेव-२

 

प्रथमो जंबु द्वीप, घातकी वर बीजो-२ |

पुष्कर पूरव शोभित, पुष्कर वर त्रीजो || जयदेव-२ ||

 

चोथो वारूण द्वीप, पंचम क्षीरवर-२ |

छठ्ठो घृतवर शोभित, सप्तम इक्षुवर || जयदेव-२ ||

 

अष्टम शोभे द्वीप नन्दीश्वर नामा-२ |

प्रति दश तेरह अकृतिम जिन धामा || जयदेव-२ ||

 

अन्जम भूधर एक, दधिमुख नग्र चार-२ |

गज मति रविकर पर्वत, तेरह गिरि सार || जयदेव-२ ||

 

एवं चौदिशी बावन, पृथ्वी धर लम्बा-२ |

गिरिपति ज्येष्ठ जिनालय, मणिमय जिनबिम्बा || जयदेव-२ ||

 

शुभ अषाढे कारतक, फाल्गुन, सुदी पक्षा-२ |

इन्द्रादिक करे पूजा, अष्टानिक दक्षा || जयदेव-२ ||

 

अष्टम दिन थी मंडित, पूनम परियंता-२ |

जिनगुणसागर गावे, पावे सुव कांता || जयदेव-२ ||



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