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      मेरे प्रिय सभी जैन माता - पिता, भाई- बहन, जेष्ठ और छोटे सभी को मेरा सादर जय जिनेन्द्र,

      आज हमारा शाश्वत सिद्ध क्षेत्र, मोक्ष भूमि सम्मेद शिखर जी को सरकार ने पवित्र तीर्थ क्षेत्र करने की बजाय eco पर्यटक स्थान में परिवर्तित करने के लिए पत्र जारी किया है, वो भी जैन समाज से बातचीत किए बिना। जब हम सब को इसके बारे में पता चला तो सभी जैन बांधव तीर्थ क्षेत्र की रक्षा के लिए आगे आए और सरकार को ज्ञापन दिया की, सरकार जो फैसला लिया है उसको वापस लेकर हमारे शिखर जी को ' पवित्र तीर्थ ' क्षेत्र घोषित करे। 

      लेकिन महिनो से अपना जैन समाज अलग अलग राज्यों में अलग स्थानों में जो शांत पूर्व आंदोलन कर रहा है, सरकार को इससे कोई भी फरक नही पड़ रहा है, और उनको इससे कोई भी मतलब नहीं है की हम सब की भावनावोंको कैसा चोट हूवा है।

     क्योंकि इस भारत देश में १४०करोड़ जनसंख्या है, उसमे हम जैन सिर्फ ०.३७ प्रतिशत (५०लाख के आस पास) है। इस कारण से अगर हम वोट देते भी नही तो उनको कुछ फरक नही पड़ता है, इसीलिए सरकार हम जैनोंको गंभीरता से नही लेती है। 

    अगर सभी जैन बांधव चाहते है की, कोई भी सरकार हम को गंभीरता से ले तो उसके लिए हमे अपनी - १.समाज की संख्या बड़ाने की बहुत जरूरी है। अगर सरकार अपनी eco पर्यटन बनाने की पत्र को अगर वापिस लेती भी है तो भी हमे दूर भविष्य को सोचकर हमे जैन समाज की संख्या बड़ाने की जरूरत है। भविष्य में कोई भी सरकार हमारे साथ ऐसा दूसरे क्षेत्रोंके साथ छल कर सकती है।

२. कम से कम ३ - ३ बच्चे होने चाइए, अगर आर्थिक स्थिति अच्छी है तो उससे भी ज्यादा संख्या हो तो बहुत अच्छा है। अगर हमारा परिवार joint family से रहता है तो उससे हमारे परिवार के आर्थिक परिस्थिति भी अच्छी तरह से संभाले रहेगी और एकता बनाए रहती है। भले ही समाज की संख्या बड़ने में समय लगेगा लेकिन हमारी भविष्य सुरक्षित रहेगा। यह कार्य की जल्दी भी है क्योंकि अगर सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने के बाद, अपनी संख्या बड़ाने की संभावनाएं कम हो जाएंगी। इससे हमारा समाज हमेशा दबा रहेगा और कमजोर होती जायेगी।

३. बड़े बड़े जैन संस्था जो है, वे आर्थिक परिस्थिति से कमजोर जैन परिवारोंको उनको व्यापार करनेमे सहायता करे, और खेती करते किसानोसे उनका उगाया हुवा धान्य, गन्ना आदि वास्तुवोंको अच्छी दाम में खरीदे और उनको सदृढ़ बनाए, ताकि वे सभी परिवार आर्थिक परिस्थिति में सुधर गए तो उनको भी अपनी परिवार की संख्या बड़ाने में और जैन धर्म, समाज की रक्षा करने में सहायता होगी। इससे उनको भी जैन होने पर और गर्व महसूस होगा, और वो भी दूसरे जैन परिवार की सहायता करेंगे।

४. कमजोर जैन परिवार के बच्चोंको पढ़ाई केलिए सहायता करे, ताकि वे भी भविष्य में अच्छे काम पर लगके अपनी परिवार को संभाल सके, धर्म और देश की रक्षा केलिए हमेशा तयार रहे। अपने तीर्थ क्षेत्रों पर अपने ही जैन समाज के लड़कोंको सेवा करने , काम करने के लिए रखिए, ताकि उससे हमारे क्षेत्र भी सुरक्षित रहे और उनका भी जीवन यापन चले।

५. जो परिवार आर्थिक स्थिति से अच्छे है, बच्चोंकी अच्छी पढ़ाई होने के बाद वे विदेश में काम करके वही बस जाते है, उनसे हाथ जोडकर अनुरोध है की, वे अपने बच्चों को भले ही विदेश काम करने भेजे लेकिन कुछ सालों बाद वे वापस भारत ही आए और यह अपना खुद का व्यापार या संस्था शुरू करे, ताकि उनका योगदान पूरा अपनी देश, धर्म और समाज के लिए हि रहे। इससे अपनी समाज और ज्यादा मजबूत और स्वाश्रित बनेगा। 

६. और सबसे बड़ी बात यह की कोई भी जैन अपने समाज की किसी भी व्यक्ति से भेद भाव न करे, बल्कि उनको मजबूत करे, उनको अहिंसा की मार्ग पर बड़ने के लिए प्रेरित और सहायता करे। चिकित्सा के क्षेत्र में सभी (अन्य भी) समाज की सेवा, सहायता करे उससे उनको भी अपने और अपने धर्म के प्रति अच्छी भाव बना रहे। 

७. सभी जैन बांधवों से अनुरोध है की अपनी परिस्थिति को सुधारने के लिए आपने कमाए हुवे अर्थ को किसी भी व्यर्थ कार्य में न उपयोग करे, आवश्यकता के अनुसार ही उपयोग करे, अगर आवश्यकता से भी कम में अपना कार्य हो रहा है तो उसीमे कार्य करे। दुसारोंको अपनी ' अमीरी ' दिखाने से अच्छा है की उसका उपयोग किसी धर्म कार्य हो या असक्षम परिवार की सहायता करके अनर्थ दंड पाप से बचे और पुण्य बढ़ाए। और सभी जैन परिवार अपनी आय की अपनी शक्ति के अनुसार कम से कम रोज १% तो धर्म के लिए दान देनी चाइए। इससे आप का भी पुण्य बडेगा और धर्म की भी रक्षा जरूर होगी, और एक बड़ी बात यह की इससे अपने बच्चोंको दान देने का संस्कार भी आयेंगे।

८. सभी माता पिता कोई भी हो अपने बच्चोंको धर्म के basic ज्ञान तो देना चाइए, ताकि उनको अपने धर्म के ऊपर ' आस्था, श्रद्धा, विश्वास, स्वाभिमान और समर्पण ' बना रहे।  

      इससे ही धर्म की रक्षा होगी और सभी समाज और सरकार अपनी इज्जत करेंगे, हमको गंभीरता से लेंगे और हमारी ताकत को पहचान पाएंगे। 

         सभी से निवेदन है की आप सब इस संदेश को सभी जैन बांधवोंको भेजिए और समाज में जागरण लाइए। धर्म की रक्षा के लिए हाथ बडाईये।  

      इस संदेश से कोई छेड़ छाड़ न करे ।

                🙏उत्तम क्षमा 🙏

                   " जय जिनेन्द्र "

 

 

 

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