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Rajendra123

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About Rajendra123

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  1. हम हर समय मन,वचन,काय से और कृत, कारित,अनुमोदना से और समरम्भ, समारम्भ ,आरम्भ और क्रोध,मान, माया,लोभ से 3×3×3×4=108 द्वारों से कर्मो का आश्रव करते रहते हैं । इसीलिए 108 बार जाप करते हैं,जिससे उन पापों का सँवर और प्रक्षालन हो सके।
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