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  1. Approve next day hota hien warna sab answer dekh lenge -sab ek jaisa answer likh denge
  2. केवलज्ञान जिन्होंने पाया, भरत क्षेत्र में प्रथम कहाया। प्रथम प्रभु का नाम बताओ, केवलज्ञानी तुम बन जाओ॥
  3. भद्रबाहु स्वामि श्रुतधारी, शीश झुकाए जनता सारी । देह कहाँ पर त्यागी गुरुवर, कौन बताए सुख का सरवर ॥
  4. झूठी है संसार की माया, युद्ध क्षेत्र में समझ है आया । गज पर ही कचलोंच है कीना,राजा कौन सा कहो नवीना ॥
  5. पूज्यपाद मुनि ने है लिक्खा, इष्टोपदेश शुभ नाम है रक्खा । कुल श्लोक है कितने इसमें, सही बताओ ज्ञात हो क्षण में ॥
  6. जिसने जितना पाप कमाया, उसने उतना दुख ही पाया । पटलों की संख्या बतलाओ,अलग-अलग सब में गिनवाओ ॥
  7. देव मनुज तिर्यञ्च नारकी, सम्यक् दृष्टि मात्र पारखी । गुणस्थान हैं किसमें कितने, जिनवाणी को धारो चित में ॥
  8. आप अगले दिन पुनः उस पहेली का लिंक खोले आप को स्वयं पता चल जाएगा सही उत्तर
  9. जीवन को उन्नत है बनाता, नरक पतन से हमें बचाता । अष्ट मूलगुण कौन से धारे, कहे जिनागम हमें सहारे ॥
  10. धन्य धन्य है प्रभु की माता, इन्द्र भी जिनको शीश नवाता । सोलह स्वप्न कौन से भाई, देखे हैं तीर्थंकर माई ॥ 17 September paheli https://jainsamaj.vidyasagar.guru/forums/topic/636-आज-17-सितम्बर-की-पहेली/
  11. मल मूत्रों का बना पिटारा, दुर्जन जैसा तन का सहारा । भावना कौन सी है कहलाती, है वैराग्य भाव उपजाती ॥
  12. सुन्दर रूप मनोहर काया, श्वेत वर्ण है जिनने पाया । तीर्थंकर को शीश झुकाओ, फिर उनका है नाम बताओ ॥ आज रात्रि 10 बजे तक उत्तर दे सकते हैं दिए गए सभी उत्तर दस बजे तक किसी को नहीं दिखेंगे
  13. सात भूमि में कहीं न साता, दुख ही दुख मिलता है भ्राता । अष्टम्भूमि का नाम बताओ, प्राप्त करो तो सुख पा जाओ ॥ आपके उत्तर 24 घंटे तक किसी को भी नहीं दिखेंगे
  14. बार-बार मरकर भी जनमता, लाख चौरासी योनि भटकता । इनको पृथक् पृथक् गिनवाओ,सिद्ध बनो फिर लौट न आओ ॥ आपके उत्तर 24 घंटे तक किसी को नहीं दिखेंगे
  15. णमोकार की महिमा न्यारी, सदा रखो तुम इससे यारी शत अठ बार जपे क्यों त्राता, ज्ञात तुम्हें हो कह दो भ्राता ॥
  16. कर्म धूल को हैं चिपकाती, आतम को मैला है बनाती । नाम कषायों के भेद सहित बतलाओ, छुटकारा तुम इनसे पाओ ॥ रात्रि 10 बजे तक उत्तर दे सकते हैं सभी के द्वारा दिए गए उत्तर रात्रि 10 बजे तक छुपे रहेंगे
  17. ऋषभदेव की जिसमें गाथा, आदि पुराण है ग्रन्थ कहाता। रचा है किसने हमें बताना, गुरुवर को है शीश नवाना॥
  18. अर्हत् सिद्धाचार्य उपाध्याय, साधु जी को हम नित ध्याय । हमें मूलगुण सबके बोलो, कर्म काट मुक्ती पट खोलो ॥
  19. जिनेन्द्रवर्णी ने संजोया, जैनधर्म का जिसमें खोया (खोबा)। मूल ग्रन्थ का नाम बताओ, मधुर जैनगीता भी गाओ॥
  20. क्या पहेली प्रतिदिन जारी रखें ?
  21. ☀ आज अनंत चतुर्दशी पर्व, मोक्ष कल्याणक पर्व व उत्तम ब्रम्हचर्य धर्म का दिन है☀ जय जिनेन्द्र बंधुओं, आज १ सितंबर, दिन मंगलवार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी शुभ तिथि को दशलक्षण पर्व का दसवाँ व अंतिम दिन तथा १२ वें तीर्थंकर देवादिदेव श्री १००८ वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक पर्व तथा चतुर्दशी पर्व का दिन है- 🙏🏻 इस पर्वराज में सभी श्रावक अत्यंत भक्ति पूर्वक जिनेन्द्र प्रभु की आराधना करते ही हैं, कल वासुपूज्य भगवान की पूजन कर व निर्वाण लाडू समर्पित करके भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाएँ। 🙏🏻 पर्वराज ने पुनीत अवसर पर पूरे भारतवर्ष ही नहीं पूरे विश्व में सभी जैन जन भक्ति पूर्व
  22. मध्यलोक के बीच में पर्वत, नाम सुमेरु देव हैं अर्चत । इसकी तुम ऊँचाई बताओ, कितने मन्दिर यहाँ गिनाओ ॥
  23. णमोकार शुभ मन्त्र कहाता, पैंतीस अक्षर की है गाथा । छ:अक्षर का मन्त्र बताओ, नित जप कर तुम कर्म खपाओ ॥ उत्तर एक बार ही दे आपके उत्तर किसी को नहीं दिखेंगे निवेदन : सभी को इसमें भाग लेना सिखाएं 5 मित्रों को इसकी जानकारी दें सबसे पहले वेबसाइट पर लॉग इन करें फिर उत्तर दे पाएंगे
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