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Lyric: भक्तामर स्तोत्र श्लोक 43
कुन्ताग्र-भिन्न-गज-शोणित-वारिवाह,
वेगावतार-तरणातुर-योध-भीमे।

युद्धे जयं विजित-दुर्जय-जेय-पक्षास्-
त्वत्पाद-पङ्कज-वनाश्रयिणो लभन्ते॥ 43॥
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