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Lyric: भक्तामर स्तोत्र श्लोक 41
रक्तेक्षणं समद-कोकिल-कण्ठ-नीलम्,
क्रोधोद्धतं फणिन-मुत्फण-मापतन्तम्।

आक्रामति क्रम-युगेण निरस्त-शङ्कस्-
त्वन्नाम- नागदमनी हृदि यस्य पुंस:॥ 41॥
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