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Lyric: भक्तामर स्तोत्र श्लोक 36
उन्निद्र-हेम-नव-पङ्कज-पुञ्ज-कान्ती,
पर्युल्-लसन्-नख-मयूख-शिखाभिरामौ।

पादौ पदानि तव यत्र जिनेन्द्र ! धत्त:,
पद्मानि तत्र विबुधा: परिकल्पयन्ति॥ 36॥
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