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Lyric: भक्तामर स्तोत्र श्लोक 32
गम्भीर-तार-रव-पूरित-दिग्विभागस्-
त्रैलोक्य-लोक -शुभ-सङ्गम -भूति-दक्ष:।

सद्धर्म -राज-जय-घोषण-घोषक: सन्,
खे दुन्दुभि-ध्र्वनति ते यशस: प्रवादी॥ 32॥
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