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Showing content with the highest reputation since 08/24/2020 in Posts

  1. क्या पहेली प्रतिदिन जारी रखें ?
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  2. जिनेन्द्रवर्णी ने संजोया, जैनधर्म का जिसमें खोया (खोबा)। मूल ग्रन्थ का नाम बताओ, मधुर जैनगीता भी गाओ॥
    2 points
  3. जय जिनेन्द्र, आज से नया प्रयोग - प्रतिदिन एक पहेली (प्रश्न ) का पक्ष में दो अरु माह में चार, पर्व है आते सदाबहार। नाम पर्व का हमें बताना, संयम धर जीवन सफल बनाना॥ उत्तर एक बार ही दे आपके उत्तर किसी को नहीं दिखेंगे
    2 points
  4. १-ऐरावत हाथी, २-सफेद बैल, ३-सिंह, ४-दो सफेद फूल, ५-सिंहासन पर लक्ष्मी, ६-पूर्ण चंद्रमा, ७-उदित सूर्य, ८-दो स्वर्ण कलश, ९-युगल मछली, १०-तालाब, ११-समुद्र, १२-स्वर्णमय सिंहासन, १३-रत्नमय विमान, १४-नाग भवन, १५-रत्न, १६-निर्धूम अग्नि।
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  5. ऐरावत हाथी, श्बेत बृषभ, सिहं के स्वप्न, हाथी के द्वारा परदो कलशों से स्नान करती हुई लक्ष्मी, दो पुष्प मालायें, अखण्ड चन्द्र बिम्व, उदय होता हुआ सूरज, मीन युगल, दो कनकमय पूर्व कलश, कमलों से सुशोभित सरोवर, गंभीर समुद्र, रत्नजड़ित सिहांसन, छोटी छोटी घंटिकाओंसे सुशोभित विमान, नागेन्द्र का भवन, प्रदीप्त पंचवर्णो के उत्मोतम रत्नों की राशि, निर्धूम अगिन बोबी जैन रेवाड़ी हरियाणा
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  6. णमोकार की महिमा न्यारी, सदा रखो तुम इससे यारी शत अठ बार जपे क्यों त्राता, ज्ञात तुम्हें हो कह दो भ्राता ॥
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  7. अर्हत् - 46 सिद्धा - 8 Aचार्य - 36 उपाध्याय,-25 साधु - 28 is tarah sbke alg alg mulgun hote hai.
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  8. प्रो. (डॉ.) कमलचन्द सोगाणी यह सर्वविदित है कि प्राकृत भाषा जैनधर्म-दर्शन और आगम की मूल भाषा है। यही तो महावीर की वाणी है जो लोक भाषा प्राकृत में गुम्फित है. रचित है और प्रवाहित है। जैन तत्वज्ञान के जिज्ञासु को प्राकृत भाषा के ज्ञान के बिना आगम का प्रामाणिक ज्ञान मिलना संभव नहीं है। जैन विद्वानों को तो जैनधर्म-दर्शन-आगम को सम्यक रूप से हृदयंगम करने के लिए प्राकृत भाषा में पारंगत होना ही चाहिये। हर्ष का विषय है कि आज विद्यार्थी व विद्वान विभिन्न कारणों से संस्कृत व अंग्रेजी तो पढ़ ही रहे हैं, परन्तु खेद है कि उनकी प्राकृत पढ़ने में रुचि नहीं है। यह बहुत चिंताजनक स्थिति है। यह कहना
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  9. अर्हत् सिद्धाचार्य उपाध्याय, साधु जी को हम नित ध्याय । हमें मूलगुण सबके बोलो, कर्म काट मुक्ती पट खोलो ॥
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  10. Ji पहेलियों का उत्तर ढूंढने के लिए हमें बहुत सारी शास्त्र किताबें से उत्तर ढूंढना पड़ता है और इससे हमारी ज्ञान की प्राप्ति होती है आप पहेलियां दिल्ली भेजा कीजिए। ज्ञान बढ़ता है भैया जी पहेली का उत्तर देने से हमारे ज्ञान की प्राप्ति होती है। रोज एक नया ज्ञान मिलता है। जिनवाणी की आराधना होती है। जय जिनेंद्र भैया जी
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  11. हाँ। प्रतिदिन जारी रखे।
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  12. Aur koi sujhav nahi Sirf haa
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  13. 1 point
  14. ☀ आज अनंत चतुर्दशी पर्व, मोक्ष कल्याणक पर्व व उत्तम ब्रम्हचर्य धर्म का दिन है☀ जय जिनेन्द्र बंधुओं, आज १ सितंबर, दिन मंगलवार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी शुभ तिथि को दशलक्षण पर्व का दसवाँ व अंतिम दिन तथा १२ वें तीर्थंकर देवादिदेव श्री १००८ वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक पर्व तथा चतुर्दशी पर्व का दिन है- 🙏🏻 इस पर्वराज में सभी श्रावक अत्यंत भक्ति पूर्वक जिनेन्द्र प्रभु की आराधना करते ही हैं, कल वासुपूज्य भगवान की पूजन कर व निर्वाण लाडू समर्पित करके भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाएँ। 🙏🏻 पर्वराज ने पुनीत अवसर पर पूरे भारतवर्ष ही नहीं पूरे विश्व में सभी जैन जन भक्ति पूर्व
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  15. इस (सुमेरू) पर्वत की ऊंचाई १०००४० योजन है और इसमें चार वन में, चारों दिशाओं में, १-१ जिन मंदिर होने से, कुल १६ जिन मंदिर है।
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  16. मध्यलोक के बीच में पर्वत, नाम सुमेरु देव हैं अर्चत । इसकी तुम ऊँचाई बताओ, कितने मन्दिर यहाँ गिनाओ ॥
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  17. हिंसा पाप है बड़ा कहाता, दुर्गतियों में वो ले जाता । चार भेद हैं कौन बताए, त्यागी बन कर सुख पा जाए ॥ उत्तर एक बार ही दे आपके उत्तर किसी को नहीं दिखेंगे
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