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अजित कुमार के जैन

तत्वार्थ सूत्र स्वाध्याय अध्याय 2 सूत्र 7

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असाधारण पारिणामिक भाव

    पारिणामिक भाव उन्हें कहते हैं जो स्वभाव रूप में  जीव और अजीव दोनों द्रव्यों में पाये जाते हैं। वह स्वभाव जोअचलित हो तथा जिससे कोई द्रव्य कभी भी चलित  न हो ,च्युत न हो उसे ही पारिणामिक भाव कहते हैं।  उदाहरण के तौर पर जीव द्रव्य कभी अजीव द्रव्य नहीं हो सकता तथा अजीव द्रव्य कभी जीव द्रव्य  नहीं हो सकता।पारिणामिक भाव दो प्रकार के होते हैं।

१. असाधारण पारिणामिक भाव

        जीव के वो भाव जो केवल जीव द्रव्य में ही पाये जाते हैं,अन्य शेष पाँच द्रव्यों में नहीं पायेजाते हैं।जैसे जीवत्व,भव्यत्व और अभव्यत्व ।ये जीव के असाधारण पारिणामिक भाव हैं।

साधारण पारिणामिक भाव

एसे पारिणामिक भाव जो जीव व अजीव दोनों में पाये जाए,उन्हें साधारण  पारिणामिकभाव कहतें हैं।जैसे अस्तित्व,नित्यत्व ,प्रदेशतत्व,पर्यायत्व ,वस्तुत्व,द्रव्यत्व,प्रमेयत्व ,अगुरूलघुत्व आदि आदि

Edited by Pramod jain1954

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