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जैन समाज आत्म विश्लेषण - समृद्धि और विकास की दिशा में कैसे बढ़ेंगे कदम

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 SWOT Analysis - Strength, Weakness, Opportunities & Threat 

  • क्या हैं समृद्ध समाज एवं विकसित समाज की परिभाषा 
  • किन मापदंडों पर समुदाय की समृद्धि एवं विकास को मापा जाता है ?
  • जैन समाज को समृद्धि एवं विकिसित बनाने के लिए आपके क्या सुझाव हैं ?

आप इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं - तो हमे जरूर बताएं |

आप अपने विचार अंग्रेजी एवं हिंदी , किसी भी भाषा में व्यक्त कर सकते हैं - हम चाहेंगे की आप हिंदी में प्रयास करें |

 

 

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जय जिनेन्द्र

अयोध्या जी मे जैन समाज ने होने के कारण मंदिरों की स्तिथी ठीक नही है पुनर्वास योजना मैंने चलाई हैं जो लोग बसना चाहते है वो संपर्क करे

नीरज सेठीया अयोध्या up

9451862874

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जैन समाज को समृद्धि एवं विकिसित बनाने के लिए आपके क्या सुझाव हैं ?

 

pehle to other cast ke liye jo udarta dikhate hai wo bandh karo aur samaj mai hi udarta dikhaye aur anukampa dan karte hai to use kam ya bandh karo aur wohi paisa samaj mai jaroorat walo ko gupt daan k jariye pochaiye ye sabse pehle karne ki jaroorat hai

tabhi vikas ki aur bad sakthe hai

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अपने समाज की लडकीया भाग के अन्य समाज मे लव्ह म्यारेज कर रही हैं, इस पर काम होना चाहीये। हमने महाराष्ट्र मे मुनीश्री अक्षयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से यह कार्य प्रारंभ कर दिया है।

- अमोल गाट, हुपरी

 

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It seems to me as the discussion is not going in right direction ..let me add some points

The factors I can try to find out for evaluation 

1. Healthy Jain Samaj
2. Intellectual Jain Samaj
3. Entrepreneurial Jain Samaj - Wealthy Jain Samaj
4. Cultural values resembling Jain Samaj
5. Digitally literate, technology leader Jain Samaj


All above parameters be looked in the various age groups in different way

60 years above
50 to 60 years of age
30 to 50 years of age
20 to 30 years of age
8 to 20 years of kids
below 8 years

---

Stepwise Role Contribution of Jain shravak for 
Self & Individual development
For family 
For Society
For country
For world
 

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1. The strength of any society or samaj depends upon strength of its members.

2. The strength of members depends on the education, helth, financial condition, unity, skills etc.

3. To offen religiius group or samaj neglect above mention considering it as materilistic.

4.If we can help members to become strong samaj will become strong.

5.Members are like children. They are future of samaj. Invest in them to get better dividend later on. 

6. Invest but invest wisely on right people.

  • Thanks 1

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जैन समाज की पुनर्वास योजना

Terthankar भगवन के जन्मस्थान पर समाज को फिर से बसाओ जिससे अभिषेक और पूजा हो सके ।

गरीब समाज को रोजगार मिल सके ।

अयोध्या up में मै आवाहन करता हू । जो लोग आना चाहे उनका स्वागत है

नीरज सेठीया जैन , 9451862874

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आज भारत देश में वेस्टर्न कल्चर (vaishya sanskriti) ‌ बहुत तेजी से बढ़ रही है उसे रोकना बहुत जरूरी है नहीं तो समझ तो वैसे ही खत्म हो चुका है

सबसे पहले भाषा -हमारी मातृभाषा कुछ है राष्ट्रभाषा हिंदी है तो उसे ही आगे बढ़ाना होगा घर में मातृभाषा का उपयोग ही हो ना कि हिंदी का क्योंकि हिंदी राष्ट्रभाषा है और हमारी मातृभाषा भी है जिसे बच्चे ना तो समझते हैं न समझना चाहते हैं वह तो अंग्रेजीयत  में घुल मिल चुके हैं सबसे पहले उन्हें मातृभाषा फिर राष्ट्रभाषा सिखाना जरूरी है नहीं तो हमारी मातृभाषा खत्म हो जाएगी राष्ट्रभाषा भी हो चुकी है

दूसरा भोजन- हमारे घरों में सदियों से जो भोजन चला आ रहा था वही शुरू करना होगा नहीं तो हम नष्ट हो चुके हैं ना जाने कितने पदार्थों में मांस का उपयोग हो जाता है अनजाने में E-नंबर्स के जरिए प्रिजर्वेटिव्स के जरिए अगर हमें स्वस्थ रहना है तो हमें वही करना होगा जो हमारे पूर्वजों ने किया है भोजन में हर क्षेत्र में पांच P से दूर रहे process (प्रक्रिया) preservative (खाने को खराब होने से रोकने वाले पदार्थ) packed(डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ) plastic औरr paper चींटी की दोनों बहुत जहरीले होते हैं इनके अंदर का ही तरह के हानिकारक केमिकल होते हैं

तिहरा भूशा- हमारे अंग पर अंग्रेजों के वस्त्र मुसलमानों के वस्त्र और पंजाबियों के वस्त्र दिखाई पड़ते हैं जैसे सूट जींस टीशर्ट गाउंस और भी बहुत यह सब हमारे नहीं किसी और के वस्त्र है क्योंकि हम तो बचपन से यही देखते हैं कि हमारी माई कैसे रहती थी साड़ी में नानी कैसे रहती थी साड़ी में दादी कैसे रहती थी साड़ी में हमारी शादी में कैसे रहती है साड़ी में तो वही हमारा वस्त्र है अन्य नहीं हमारा राष्ट्र वस्त्र भी साड़ी है ना कि सूट पुरुषों में भी कोट पेंट हमारा नहीं है कुर्ता पजामा हमारा है। वस्त्र सबसे ज्यादा जरूरी है इससे हमारी पहचान होती है और वह हमारा ही होना चाहिए ना किसी अन्य धर्म का यह किसी अन्य धर्म के पालक का तभी हम एक से नजर आएंगे और अपने देश के नजर आएंगे जो सबसे पहले हमारी दृष्टि में वस्त्र ही आते हैं

व्यवहार- भी हमें हमारी संस्कृति का ही अपनाना होगा संस्कार रीति रिवाज परंपरा सब हमारे होने चाहिए ना किसी अन्य धर्म के मैं किसी अन्य देश के तभी हम एक कहलाएंगे

 

इन बातों से हम ऊपर आ सकते हैं वरना तो कोई सवाल ही नहीं उठता कि हम कभी ऊपर आएंगे नीचे और जरूर जाएंगे आने वाले कुछ समय में

 

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