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About This Club

जैन समाज दमोह

Category

Regional Samaj

Jain Type

Digambar
Shwetambar

Country

Bharat (India)

State

Madhya Pradesh
  1. What's new in this club
  2. अतिशय एवं कला क्षेत्र तेजगढ़ मध्यप्रदेश नाम एवं पता - श्री दिगम्बर जैन चन्द्रोदय कलातिशय तीर्थक्षेत्र, तेजगढ़ पोस्ट-तेजगढ़, तहसील-तेन्दूखेड़ा, जिला-दमोह (मध्यप्रदेश)पिन-470 880 टेलीफोन - 09981159394, 08827449377 क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 0, कमरे (बिना बाथरूम) - 2 हाल - X गेस्ट हाऊस - 1 यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 20. भोजनशाला - नहीं औषधालय - नहीं पुस्तकालय - हैं, शास्त्र-100 विद्यालय - नहीं एस.टी.डी./पी.सी.ओ.- नहीं आवागमन के साधन रेल्वे स्टेशन दमोह - 35 कि.मी. बस स्टेण्ड तेजगढ़ - 1 कि.मी., दमोह - 35 कि.मी. पहुँचने का दमोह - जबलपुर - पाटन मार्ग कोनीजी होते हुए। सरलतम मार्ग दमोह से तेजगढ़ - उत्तम मार्ग । निकटतम प्रमुख नगर - दमोह - 35 कि.मी., जबलपुर - 75 कि.मी. प्रबन्ध व्यवस्था संस्था - श्री दिगम्बर जैन चन्द्रोदय विकास समिति, तेजगढ़ अध्यक्ष - श्री अरविन्द बडेराय (088785 09595) उपाध्यक्ष - श्री संतोष सेठ (099931-62622) महामंत्री - श्री अतुल जैन, पुजारी (09981159394) कोषाध्यक्ष - श्री जवाहर जैन (088274 49377) क्षेत्र का महत्व क्षेत्र पर मन्दिरों की संख्या : 05 क्षेत्र पर पहाड़ : नहीं ऐतिहासिकता : यहाँ के मन्दिर सैकड़ों वर्ष प्राचीन एवं भव्य हैं। सभी मन्दिरों का जीर्णोद्धार होना है। चन्द्रप्रभु भगवान की मूर्तियों के कारण चन्द्रोदय धाम नाम पड़ा। यह जिनधाम गौरेया नदी से थोड़ी दूरी पर है । तीर्थंकर उद्यान में 24 दीक्षा तपोवृक्ष, 24 बोधिज्ञान जिनवृक्ष लगाये जा रहे हैं। यहाँ ऊँकार, ह्रींकार, श्रकार की स्थापना हो रही है जिसमें पंचपरमेष्ठी, 24 तीर्थंकरों (नवग्रहों के अनुसार) की मूर्तियाँ विराजमान होंगी। समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र - कोनीजी - 40 कि.मी. मढियाजी -75 कि.मी., आदीश्वरगिरि, नोहटा -21 कि.मी., कुण्डलपुर -70 कि.मी., अतिशय क्षेत्र-पटनाजी रहली, जिला-सागर-65 कि.मी. (पश्चिम) दिगम्बर जैन तीर्थ निर्देशिका आपका सहयोग : जय जिनेन्द्र बन्धुओं, यदि आपके पास इस क्षेत्र के सम्बन्ध में ऊपर दी हुई जानकारी के अतिरिक्त अन्य जानकारी है जैसे गूगल नक्षा एवं फोटो इत्यादि तो कृपया आप उसे नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें | यदि आप इस क्षेत्र पर गए है तो अपने अनुभव भी लिखें | ताकि सभी लाभ प्राप्त कर सकें|
  3. अतिशय क्षेत्र/कला क्षेत्र नोहटा (आदीश्वरगिरि) मध्यप्रदेश नाम एवं पता - श्री दिगम्बर जैन अतिशय तीर्थक्षेत्र, आदीश्वरगिरि, नोहटा ग्राम-नोहटा, तहसील-जबेरा, जिला-दमोह (मध्यप्रदेश) पिन - 470 663 टेलीफोन - 078984 89110 क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - निर्माणाधीन,कमरे (बिना बाथरूम) -7 हाल - 1-निर्माणाधीन (यात्री क्षमता-25), गेस्ट हाउस - शासकीय यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 100. भोजनशाला - अनुरोध पर, सशुल्क औषधालय - ग्राम में सभी प्रकार के हैं पुस्तकालय - है-200 पुस्तकें उपलब्ध हैं। विद्यालय - विचाराधीन है। एस.टी.डी./पी.सी.ओ.- है। आवागमन के साधन रेल्वे स्टेशन - दमोह - 23 कि.मी. बस स्टेण्ड - नोहटा - 1 कि.मी. पहुँचने का सरलतम मार्ग - दमोह - जबलपुर राजमार्ग क्र. 37 पर, दमोह से 23 कि.मी. एवं जबलपुर से 82 कि.मी. निकटतम प्रमुख नगर - दमोह - 23 कि.मी. प्रबन्ध व्यवस्था संस्था - श्री दि. जैन अतिशय तीर्थक्षेत्र,आदीश्वरगिरि क्षेत्र समिति,नोहटा अध्यक्ष - श्री उमेश कुमार जैन (07606-257394, 09893674056) महामंत्री - श्री भागचन्द गांगरा (07606-257204) मंत्री - श्री खेमचन्द्र जैन (शिक्षक) व्यवस्थापक - श्री भालचन्द जैन (78984 89110) क्षेत्र का महत्व क्षेत्र पर मन्दिरों की संख्या : 01 एवं ग्राम में 3, प्रस्तावित - 01 क्षेत्र पर पहाड़ : पहाड़ी है, पहुँच मार्ग सुगम है। सभी वाहन जाते हैं। मुख्य सड़क स्थित प्रवेश द्वारा से 1 कि.मी. दूरी पर है। ऐतिहासिकता : इस पवित्र ग्राम में नौ मढ़ा (पाषाण निर्मित) थे, नौ-हाट (बाजार) लगने से नोहटा पड़ा। यह क्षेत्र ब्यारमा एवं गौरैया सरिता संगम के तट की पहाड़ी पर स्थित है। इस क्षेत्र में स्थापित विभिन्न अतिशयकारी प्रतिमाएँ9वीं - 10 वीं शताब्दी से लेकर 21 वीं शताब्दी तक की हैं। भगवान आदिनाथ एवं चन्द्रप्रभ भगवान की भी प्राचीन मूर्तियाँ है। यहाँ मंदिर एवं मूर्तिकला का स्वर्णिम युग रहा है। यहाँ सन् 1989 को आचार्य विद्यासागरजी का अल्प प्रवास हुआ था। विरासत में मिली आदीश्वरगिरि शाश्वत भूमि है। क्षेत्र में अष्ट प्रातिहार्य युक्त प्रतिमाएँ हैं। भ, आदिनाथ (7 फुट -लाल पाषाण) व शिकाल चौबीसी जिनालय का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। देव दर्शन सदैव प्राप्त होते हैं। विशेष जानकारी : विश्व में प्रथम अष्ट जिन बिम्ब युक्त 'चैत्य स्तंभ’ भी है। अध्ययन व अन्वेषण का विषय है। समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र - कुण्डलपुर (दमोह)-60 कि.मी., कोनीजी (पाटन)-65 कि.मी., बहोरीबन्द-70 कि.मी., मढ़ियाजी (जबलपुर) -85 कि.मी., पटेरियाजी (गढ़ाकोटा)-58 कि.मी., चौपड़ा-चंडी (दमोह) - 15 कि.मी., तेजोदय-तेजगढ़-16 कि.मी. आपका सहयोग : जय जिनेन्द्र बन्धुओं, यदि आपके पास इस क्षेत्र के सम्बन्ध में ऊपर दी हुई जानकारी के अतिरिक्त अन्य जानकारी है जैसे गूगल नक्षा एवं फोटो इत्यादि तो कृपया आप उसे नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें| यदि आप इस क्षेत्र पर गए है तो अपने अनुभव भी लिखें| ताकि सभी लाभ प्राप्त कर सकें|
  4. अतिशय क्षेत्र निसईजी सूखा (पथरिया) मध्यप्रदेश नाम एवं पता - श्री तारण तरण अतिशय क्षेत्र, निसईंजी सूखा ग्राम-सूखा, तह. - पथरिया, जिला - दमोह (मध्यप्रदेश) पिन - 470666 टेलीफोन - 07746957551 क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 3, कमरे (बिना बाथरूम) - 53 हाल - 2 (यात्री क्षमता - 200), गेस्ट हाउस -४ यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 600. भोजनशाला - निःशुल्क, अनुरोध पर औषधालय - नहीं पुस्तकालय - है। विद्यालय - नहीं एस.टी.डी./पी.सी.ओ.- नहीं आवागमन के साधन रेल्वे स्टेशन - पथरिया से सूखा निसईजी -7 कि.मी., (बीना - कटनी रेलमार्ग) बस स्टेण्ड - बण्डा पथ पर हर घंटे बसें उपलब्ध है। पहुँचने का सरलतम मार्ग - पथरिया से हर घंटे पर बसें उपलब्ध हैं। निकटतम प्रमुख नगर - पथरिया -7 कि.मी. प्रबन्ध व्यवस्था संस्था - श्री 1008 तारण तरण दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र निसईजी सूखा अध्यक्ष - श्रीमंत सेठ श्री प्रेमचंद जैन, सागर (09425171188) मंत्री - श्री महेन्द्र कुमार जैन, राजनाँदगांव (094252 40449) उपमंत्री - श्री सुरेशचन्द जैन प्रबन्धक - श्री संतोषकुमार जैन क्षेत्र का महत्व क्षेत्र पर मन्दिरों की संख्या : 01 क्षेत्र पर पहाड़ : नहीं ऐतिहासिकता : यह तीर्थक्षेत्र 16वीं शताब्दी के महान आध्यात्मिक संत तारण तरण मंडलाचार्य की जैन दर्शन प्रचारस्थली है। यहाँ अष्टान्हिका पर्व पर वार्षिक मेला लगता है, जिसमें देश के विभिन्न स्थानों से विद्वान एवं त्यागीव्रती पधारतें हैं। यहाँ हमेशा कुछ न कुछ अतिशयकारी कार्य होते रहते हैं। पर्युषण पर्व पर प्रतिवर्ष आध्यात्मिक शिविर का आयोजन किया जाता है जिसमें देश के चोटी के विद्वानों द्वारा तत्व निर्णय एवं भेद विज्ञान की सूक्ष्म विवेचना मुमुक्षुओं के हितार्थ की जाती है। समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र - कुण्डलपुर - 70 कि.मी., कोनीजी - 110 कि.मी., नैनागिरि - 115 कि.मी., पपौराजी - 105 कि.मी., खजुराहो - 175 कि.मी., मढियाजी - 140 कि.मी. आपका सहयोग : जय जिनेन्द्र बन्धुओं, यदि आपके पास इस क्षेत्र के सम्बन्ध में ऊपर दी हुई जानकारी के अतिरिक्त अन्य जानकारी है जैसे गूगल नक्षा एवं फोटो इत्यादि तो कृपया आप उसे नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें| यदि आप इस क्षेत्र पर गए है तो अपने अनुभव भी लिखें| ताकि सभी लाभ प्राप्त कर सकें|
  5. सिद्धक्षेत्र/अतिशय क्षेत्र कुण्डलपुर मध्यप्रदेश नाम एवं पता - श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र, कुंडलगिरि, कुण्डलपुर ग्राम - कुंडलपुर (दमोह), तहसील-पटेरा, जिला-दमोह (मध्यप्रदेश) पिन-470773 टेलीफोन - 07605 - 272230, 272293, 272647, 08349335356 (प्रबंधक) क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 100, (बिना बाथरूम) - 100 हाल - 3 (यात्री क्षमता - 700), गेस्ट हाउस - 6 यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 4000. अन्य - प्रवचन हॉल, विद्या-भवन, ज्ञान साधना केन्द्र भोजनशाला - नियमित, सशुल्क औषधालय - है (2.3 कि.मी.) शासकीय पुस्तकालय - है। विद्यालय - महावीर उदासीन आश्रम एस.टी.डी./ पी.सी.ओ. - है। आवागमन के साधन रेल्वे स्टेशन - दमोह - 38 कि.मी., बम्बई, बनारस, सुरत, दिल्ली से सीधा सम्पर्क बस स्टेण्ड - दमोह - 38 कि.मी., बस एवं टेक्सी उपलब्ध पहुँचने का सरलतम मार्ग - जबलपुर, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, कटनी आदि से दमोह होकर बस द्वारा कुण्डलपुर जाया जा सकता है। निकटतम प्रमुख नगर - दमोह - 38 कि.मी. प्रबन्ध व्यवस्था संस्था - श्री दि. जैन सिद्धक्षेत्र कुंडलगिरि सार्वजनिक न्यास, कुण्डलपुर अध्यक्ष - सिंघई संतोषकुमार जैन(07812-222394,09329872043) महामंत्री - श्री वीरेन्द्र बजाज (07812-222348, 094250-95548) क्षेत्र का महत्व क्षेत्र पर मन्दिरों की संख्या : 63 क्षेत्र पर पहाड़ : है (400 सीढ़ियाँ हैं, डोली की व्यवस्था है।) ऐतिहासिकता : यह क्षेत्र श्रीधर केवली की सिद्धभूमि है। भगवान आदिनाथ 'बड़े बाबा की 15 फुट ऊँची पद्मासन प्रतिमा 5वीं - 6 ठीं सदी की अतिशयकारी भव्यता लिये विराजमान है। आचार्य श्री विद्यासागरजी के 5 चातुर्मास व 7 ग्रीष्मकालीन वाचनाएँ होने से यह क्षेत्र विकसित हुआ है। महाराजा छत्रसाल ने युद्ध विजय करने पर एक पक्का घाट, जीर्णोद्धार कर पीतल का दो मन का घण्टा व अन्य वस्तुएँ भेंट की। कहते हैं यहाँ भगवान महावीर का समवशरण भी आया था। जनश्रुति के अनुसार मोहम्मद गज़नवी ने जब प्रतिमा पर छैनी लगाई तब प्रतिमा से दूध की धारा व भौंरों की पंक्ति प्रकट हुई जिससे उसे वहाँ से भागना पड़ा था। तीनों ओर पर्वत माला है। 63 मंदिर हैं एवं 1 मानस्तंभ है। आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रेरणा से बड़े बाबा के विशाल मंदिर का निर्माण प्रगति पर है। बड़े बाबा के मंदिर तक कार का रास्ता बन चुका है। वार्षिक मेले : माधसुदी 11 से पूर्णिमा तक समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र पपौराजी -194 कि.मी.,नैनागिरि -120 कि.मी.,द्रोणगिरि-147 कि.मी., रहली पटनागंज- बीना बारहा दोनों एक ही मार्ग पर -137 कि.मी. आपका सहयोग : जय जिनेन्द्र बन्धुओं, यदि आपके पास इस क्षेत्र के सम्बन्ध में ऊपर दी हुई जानकारी के अतिरिक्त अन्य जानकारी है जैसे गूगल नक्षा एवं फोटो इत्यादि तो कृपया आप उसे नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें| यदि आप इस क्षेत्र पर गए है तो अपने अनुभव भी लिखें| ताकि सभी लाभ प्राप्त कर सकें|
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